जम्मू-कश्मीर में मोहरा पावर प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार, पाकिस्तान की चिंता बढ़ी

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 120 साल पुराने मोहरा पावर प्रोजेक्ट के पुनरुद्धार की योजना बनाई है, जो 1990 से बंद था। इस निर्णय से राज्य में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और पाकिस्तान की चिंता में इजाफा हो सकता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में इसकी प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी है। यह प्रोजेक्ट कश्मीर की इंजीनियरिंग विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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जम्मू-कश्मीर में मोहरा पावर प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार, पाकिस्तान की चिंता बढ़ी

मोहरा पावर प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार

जम्मू-कश्मीर में मोहरा पावर प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार, पाकिस्तान की चिंता बढ़ी

भारत ने पिछले साल पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को रद्द किया था, और अब एक नया निर्णय लिया है जो पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन सकता है। जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य में बिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। इसी के तहत, 120 साल पुराना ऐतिहासिक मोहरा पावर प्रोजेक्ट फिर से शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जो 1990 से बंद पड़ा था। यह प्लांट कभी जम्मू-कश्मीर का मुख्य बिजली स्रोत था।

मोहरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट भारत के सबसे पुराने पनबिजली संयंत्रों में से एक है, जिसे 1905 में स्थापित किया गया था। प्रारंभ में इसकी क्षमता 5 मेगावाट थी और यह झेलम नदी पर स्थित था। इस परियोजना ने लंबे समय तक श्रीनगर और कश्मीर घाटी के कई क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति की। 1950 तक, यह घाटी का एक प्रमुख बिजली स्रोत बना रहा।

1992 में आए भूकंप ने इस प्लांट को गंभीर नुकसान पहुँचाया, जिसके बाद यह धीरे-धीरे बंद हो गया। अब, जम्मू-कश्मीर सरकार ने इसके पुनरुद्धार का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने एक सीमित टेंडर जारी करने की मंजूरी दी है।

इस प्लांट की क्षमता को बढ़ाने की योजना भी है। सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि एक ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया जाएगा, जो प्रोजेक्ट के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण में मदद करेगा। इस प्रोजेक्ट की क्षमता को 10.5 मेगावाट तक बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इसके पुनरारंभ से राज्य में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

मोहरा प्रोजेक्ट का पुनरारंभ केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की इंजीनियरिंग विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। इसके दोबारा शुरू होने से स्थानीय स्तर पर बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और पुरानी ऐतिहासिक इमारत को नई जान मिलेगी।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब केंद्र सरकार ने पिछले साल अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद इंडस वाटर ट्रीटी को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में कई पनबिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है.