जम्मू-कश्मीर के माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति वापस
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का निर्णय
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति रद्द कर दी है। यह निर्णय औचक निरीक्षण और लगातार प्राप्त शिकायतों के आधार पर लिया गया है। इसके परिणामस्वरूप कॉलेज में दाखिलों पर रोक लगा दी गई है, और पहले से प्रवेश प्राप्त छात्रों को अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।
निरीक्षण में सामने आई खामियां
रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की निरीक्षण टीम ने कॉलेज में बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक संसाधनों की गंभीर कमी का पता लगाया। शिक्षण संकाय में भारी कमी और आवश्यक पदों पर स्टाफ की अनुपस्थिति जैसे मुद्दे सामने आए। अस्पताल से जुड़ी सेवाएं भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं, और ओपीडी में मरीजों की संख्या अपेक्षित स्तर से काफी कम पाई गई।
आईसीयू और प्रयोगशालाओं की स्थिति
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कॉलेज में आईसीयू सुविधाएं पूरी तरह से कार्यशील नहीं हैं। प्रयोगशालाओं की स्थिति भी कमजोर है, और पुस्तकालय में आवश्यक शैक्षणिक सामग्री की कमी है। आयोग ने इन खामियों को गंभीर मानते हुए कहा कि ऐसे माहौल में मेडिकल छात्रों को प्रशिक्षण देना नियमों का उल्लंघन है।
धार्मिक विवाद का संदर्भ
इस कार्रवाई के पीछे हाल में उठे विवाद का भी योगदान रहा है, जिसमें कॉलेज के पहले बैच के छात्रों की धार्मिक संरचना को लेकर हंगामा हुआ था। कुछ संगठनों ने पचास छात्रों में से बहुसंख्यक मुस्लिम छात्रों की संख्या पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी दाखिले नीट परीक्षा के आधार पर मेरिट के अनुसार हुए हैं।
आयोग का स्पष्टीकरण
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने स्पष्ट किया कि इसकी कार्रवाई का आधार न तो राजनीतिक दबाव है और न ही साम्प्रदायिक मुद्दा। आयोग ने कहा कि निर्णय पूरी तरह से शैक्षणिक मानकों और निरीक्षण रिपोर्ट पर आधारित है। छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अन्य मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सभी छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेज में भेजना बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि यदि उनके बच्चे भी वहां पढ़ रहे होते, तो उन्हें चिंता होती। उन्होंने सुझाव दिया कि इस संस्थान को बंद कर देना चाहिए।
