जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले की पहली बरसी: भारतीय सेना की कड़ी चेतावनी
22 अप्रैल 2022 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की पहली बरसी पर भारतीय सेना ने आतंकियों को कड़ी चेतावनी दी है। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या की गई थी। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिन्दूर के तहत पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों को नष्ट किया और कूटनीतिक कदम उठाए। जानें इस हमले के बाद की घटनाएँ और भारत की प्रतिक्रिया।
| Apr 21, 2026, 13:32 IST
पहलगाम में आतंकी हमला: एक साल बाद की यादें
22 अप्रैल 2022 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला देश के लिए एक गहरा आघात था। इस खूबसूरत पर्यटन स्थल पर उस दिन खून की नदियाँ बह गईं, जब पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी। इस हमले की पहली बरसी के अवसर पर भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिन्दूर का जिक्र करते हुए आतंकियों को चेतावनी दी है कि मानवता की सीमाएं लांघने पर भारत का जवाब कठोर होगा और वह कभी भी इस घटना को नहीं भूलेगा।
आतंकवादियों की अमानवीयता
सेना के जनसंपर्क विभाग ने स्पष्ट किया कि जब इंसानियत की सीमाएं पार होती हैं, तब न्याय की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाती है और पूरा देश एकजुट होकर खड़ा होता है। पहलगाम हमले की एक और भयावहता यह थी कि आतंकवादियों ने पीड़ितों से उनका धर्म पूछकर उन्हें मौत के घाट उतारा, जिससे यह घटना और भी अमानवीय बन गई।
भारत का कड़ा जवाब
भारत ने इस हमले का जवाब कड़े सैन्य कदमों से दिया था। 7 मई 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिन्दूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर में स्थित नौ बड़े आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के अड्डे शामिल थे। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले और गोलाबारी की घटनाएं सामने आईं, जिससे दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। भारत ने मजबूती से जवाब देते हुए लाहौर और गुजरांवाला के पास स्थित रडार ठिकानों को नष्ट कर दिया। भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक ने भारत से संपर्क किया और 10 मई को संघर्ष विराम पर सहमति बनी।
ऑपरेशन महादेव की सफलता
इसके अलावा, ऑपरेशन महादेव भी एक महत्वपूर्ण सफलता रही, जिसमें सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को खोजकर मार गिराया। इसके साथ ही, भारत ने सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध भी समाप्त कर दिए थे। पहलगाम हमले के बाद भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को भी तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया गया था। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि भारत पर किसी भी आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
सैन्य प्रमुखों की टिप्पणियाँ
थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने इस ऑपरेशन को तीनों सेनाओं के बीच उत्कृष्ट समन्वय का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट राजनीतिक निर्देश और कार्रवाई की स्वतंत्रता के कारण यह अभियान सफल रहा। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने इसे एक निर्णायक क्षण बताया, जिसने वायु सेना की सटीकता और ताकत को प्रदर्शित किया। वहीं, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि उत्तरी अरब सागर में तैनात युद्धपोत समूह ने पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों को सीमित कर दिया था।
मानवता पर हमला
इस प्रकार, पहलगाम हमला केवल एक आतंकी घटना नहीं था, बल्कि यह मानवता पर एक गंभीर हमला था। इसके जवाब में भारत की सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि देश अपनी सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है।
