जंतर-मंतर पर प्रदर्शन: पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर बहस
जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर बहस को जन्म दिया है। पूर्व आईपीएस ओपी मिश्रा ने इस मुद्दे पर अपनी राय साझा की, जिसमें उन्होंने पुलिस की कार्रवाई के नियमों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे प्रदर्शनकारियों ने लक्ष्मण रेखा को पार किया और पुलिस को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में आंदोलनों के बदलते स्वरूप पर भी प्रकाश डाला।
| Aug 5, 2026, 16:06 IST
जंतर-मंतर पर आंदोलन और पुलिस की कार्रवाई
जंतर-मंतर में नीट परीक्षा में धांधली के खिलाफ उठे आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'संसद मार्च' के दौरान हुई हिंसा ने एक बार फिर पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर चर्चा को जन्म दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जबकि पुलिस का कहना है कि स्थिति तब बिगड़ी जब भीड़ उग्र हो गई और बैरिकेड्स को तोड़ने लगी। इस घटनाक्रम, भीड़ नियंत्रण की एसओपी (SOP) और भारतीय राजनीति में आंदोलनों के बदलते स्वरूप पर पूर्व संयुक्त पुलिस आयुक्त (Ex-IPS) ओपी मिश्रा ने 'No Filter' नामक विशेष शो में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी राय व्यक्त की।
प्रदर्शन और पुलिस की सीमाएं
प्रदर्शन और पुलिस की सीमा: जब टूटती है 'लक्ष्मण रेखा'
ओपी मिश्रा के अनुसार, संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार प्रदान करता है, और पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य इस अधिकार की रक्षा करना है। हालांकि, नई दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहाँ संसद और राष्ट्रपति भवन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान हैं, सुरक्षा के कड़े मानदंड लागू होते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब प्रदर्शनकारी पूर्व निर्धारित शर्तों और पुलिस के साथ तय लक्ष्मण रेखा को पार करते हैं। जब प्रदर्शनकारी संसद जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने का प्रयास करते हैं, तब स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है।
पुलिस बल का प्रयोग: नियम और प्रक्रिया
लाठीचार्ज और बल प्रयोग: क्या कहता है नियम?
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों को ओपी मिश्रा ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल का प्रयोग अचानक या मनमाने तरीके से नहीं किया जाता। क्राउड कंट्रोल के लिए एक लिखित एसओपी (SOP) और 'ग्रेडेड रिस्पांस' होता है।
पहला चरण: लाउड हेलर से चेतावनी
दूसरा चरण: वॉटर कैनन का प्रयोग
तीसरा चरण: लाठीचार्ज
अंतिम चरण: आंसू गैस के गोले छोड़ना
उन्होंने कहा कि जब भीड़ बैरिकेड्स तोड़ने पर आमादा हो, तो मौके पर तैनात अधिकारी को सार्वजनिक संपत्ति और जान-माल की रक्षा के लिए सख्त निर्णय लेने पड़ते हैं।
संदिग्ध गतिविधियाँ और सोशल मीडिया
बिना वर्दी में डंडे और सोशल मीडिया का 'हाफ ट्रुथ'
प्रदर्शन के दौरान बिना वर्दी और नाम प्लेट के साथ डंडे लिए घूम रहे संदिग्धों पर ओपी मिश्रा ने कहा कि पुलिस विभाग में इंटेलिजेंस और सुरक्षा से जुड़ी कई विंग्स प्लेन कपड़ों में तैनात होती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति को सीधे पुलिसकर्मी मान लेना उचित नहीं है, इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस हर वीडियो पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकती, और अफवाहों का खंडन केवल आधिकारिक माध्यमों से किया जाता है।
