छात्रों पर कार्रवाई के खिलाफ आइसा का प्रदर्शन, सरकार से की गई अपील
आइसा का आरोप: शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर दमनात्मक कार्रवाई
नई दिल्ली, 28 जुलाई: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने मंगलवार को यह आरोप लगाया कि परीक्षा पेपर के लीक होने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर देशभर में कार्रवाई की जा रही है। जबकि केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। आइसा के नेताओं ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बिहार और दिल्ली सहित कई राज्यों में छात्रों की गिरफ्तारी, हिरासत और पुलिस की कार्रवाई जारी है।
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई की सचिव अंजलि, स्वयंसेवक एम. जुनैद और कानूनी टीम के अधिवक्ता माणिक गुप्ता ने इस सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने एक ‘तथ्य-खोज रिपोर्ट’ पेश की, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया और कई स्थानों पर मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां कीं। नेहा ने कहा, ‘‘हमें आश्वासन दिया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘हालांकि, हमने देखा है कि देशभर में छात्रों की लगातार गिरफ्तारियां, मनमानी हिरासत और उन्हें डराने-धमकाने की घटनाएं हो रही हैं। सरकार को अपने वादों का पालन करना चाहिए, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना चाहिए और छात्रों की चिंताओं पर चर्चा करनी चाहिए।’’ आइसा के अनुसार, बिहार में विरोध प्रदर्शनों के बाद 600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 355 को रिहा किया गया, जबकि 300 से अधिक लोग अभी भी जेल में हैं।
नेहा ने यह भी बताया कि वह पटना में घायल प्रदर्शनकारियों से मिली थीं, जिनमें से दो छात्रों को सिवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित तौर पर पीटा गया था। उन्होंने कहा, ‘‘एक व्यक्ति के कंधे में गंभीर चोट आई है, जबकि दूसरे के पैर में गंभीर चोट लगने के कारण उसे सर्जरी की आवश्यकता है।’’ आइसा ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों ने एके-47 राइफल और पिस्तौल जैसे आग्नेयास्त्रों का इस्तेमाल किया। आइसा ने केंद्र सरकार से मांग की कि देशभर में छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को रोका जाए और हिरासत में लिए गए लोगों की तुरंत रिहाई की जाए।
