छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने चैतन्य बघेल को शराब घोटाले में दी जमानत

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ₹3,000 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़े मामलों में जमानत दी है। भूपेश बघेल ने इसे 'सत्य की जीत' बताया। ED और ACB द्वारा दर्ज मामलों में चैतन्य की भूमिका को कमतर मानते हुए अदालत ने जमानत दी। जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया।
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने चैतन्य बघेल को शराब घोटाले में दी जमानत

चैतन्य बघेल को मिली जमानत

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राज्य में कथित ₹3,000 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत प्रदान की। भूपेश बघेल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे "सत्य की विजय" करार दिया।


प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील सौरभ कुमार पांडे ने मीडिया को बताया कि अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में जमानत दी है। इनमें से एक मामला ED द्वारा दर्ज किया गया था, जबकि दूसरा राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध विंग (ACB/EOW) ने दर्ज किया।


ED ने पिछले साल जुलाई में चैतन्य बघेल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद, जब वह जेल में थे, तब ACB/EOW ने सितंबर में उन्हें अपने भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया।


जमानत का निर्णय

अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडे ने बताया कि न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने चैतन्य की जमानत याचिकाओं को मंजूर कर लिया। उच्च न्यायालय ने इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 12 दिसंबर, 2025 को अपना फैसला सुरक्षित रखा था और शुक्रवार को इसे सुनाया गया।


विशिष्ट सबूतों की कमी

जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि आवेदक की कथित भूमिका कई वरिष्ठ आरोपियों की तुलना में 'काफी कम' थी, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।


अदालत ने कहा कि जांच मुख्यतः दस्तावेजी थी और चैतन्य काफी समय तक हिरासत में रहा। एकल पीठ ने यह भी कहा कि ED द्वारा एकत्र किए गए सबूतों की सुनवाई के दौरान जांच की जाएगी।


अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि राजनीतिक प्रभाव रखने के आरोप के बावजूद गवाहों को डराने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है।


जमानत की शर्तें

जमानत देते समय न्यायालय ने कुछ शर्तें भी लगाईं, जैसे कि पासपोर्ट जमा करना और सुनवाई अदालत के समक्ष नियमित रूप से उपस्थित होना।


भूपेश बघेल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह सत्य की जीत है और आरोप लगाया कि चैतन्य को राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया गया था।


घोटाले का विवरण

ED ने 18 जुलाई को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। राज्य की एजेंसी ने 24 सितंबर को उन्हें फिर से गिरफ्तार किया। ED के अनुसार, यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ था।


केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि चैतन्य इस घोटाले के पीछे 'सिंडिकेट' का मुखिया था और उसने लगभग एक हजार करोड़ रुपये का प्रबंधन किया।