छत्तीसगढ़ में नए आपराधिक कानूनों से न्याय प्रणाली में सुधार
नए आपराधिक कानूनों का उद्देश्य
रायपुर, 2 अगस्त: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को बताया कि नए आपराधिक कानूनों का मुख्य लक्ष्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी नागरिक-केंद्रित व्यवस्था बनाना है, जिसमें पीड़ितों को त्वरित न्याय मिले और अपराधी कानून से बच न सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 1 जुलाई 2024 से लागू होने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने औपनिवेशिक काल के कानूनों को बदलकर भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाया है। साय ने यह बातें राज्य के गृह विभाग द्वारा आयोजित 'नए आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय को सशक्त बनाने' विषयक कार्यशाला में कहीं।
न्याय प्रणाली में तकनीकी बदलाव
उन्होंने आगे कहा कि नए कानून वर्तमान समय की आवश्यकताओं और उभरती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि ये कानून नागरिकों को तेज, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय प्रदान करके देश की न्याय वितरण प्रणाली में ऐतिहासिक परिवर्तन लाए हैं। उन्होंने कहा, 'पुराने कानून उस समय बनाए गए थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।'
आजकल अपराधों का स्वरूप बदल चुका है और न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका अनिवार्य हो गई है।
डिजिटल साक्ष्य की मान्यता
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए कानूनी ढांचे में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को मान्यता दी गई है, जिससे अपराधों की जांच और अभियोजन प्रक्रिया को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय का परिसर स्थापित होने से आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय वितरण प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी हो गई है।
ई-समन प्रणाली का लाभ
उन्होंने बताया कि पहले समन की तामील में कई दिन लगते थे, लेकिन अब ई-समन प्रणाली के माध्यम से समन तुरंत भेजे जा सकते हैं और उनकी डिजिटल निगरानी भी संभव है। 'न्याय श्रुति' जैसे राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंस मंच अदालत की कार्यवाही की सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्डिंग और ऑनलाइन तथा 'हाइब्रिड' सुनवाई की सुविधा प्रदान करते हैं।
अपराध एवं अपराधी निगरानी नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस) का उल्लेख करते हुए साय ने कहा कि देशभर के पुलिस थानों को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है, जिससे आपराधिक रिकॉर्ड तक त्वरित पहुंच और त्वरित पुलिस कार्रवाई संभव हो सकी है।
छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन पुलिस थाने
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी पुलिस थाने ऑनलाइन संचालित हो रहे हैं और राज्य में अब तक 1,97,547 प्राथमिकी (एफआईआर) डिजिटल माध्यम से दर्ज की जा चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह आंकड़ा किस अवधि का है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस) ने न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित किया है, जिससे सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के कारण न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी काफी कम हुई है।
मुख्य न्यायाधीश का बयान
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और दक्ष बनाएगा। उन्होंने बताया कि जून महीने में जिला अदालतों में लगभग 9,910 मामलों और उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई।
उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से 'न्याय श्रुति' मंच का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।
उपमुख्यमंत्री का बयान
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी।
