चूना: स्वास्थ्य के लिए लाभकारी गुण और उपयोग
चूना, जो कैल्शियम कार्बोनेट से बना एक अवसादी चट्टान है, स्वास्थ्य के लिए कई लाभ प्रदान करता है। इसके सही उपयोग से गंभीर बीमारियों का उपचार संभव है। इस लेख में हम चूने के गुणों और इसके विभिन्न उपयोगों के बारे में जानेंगे, जैसे कि यह कैसे त्वचा की समस्याओं, घावों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में मदद कर सकता है। जानें चूने के फायदे और इसे कैसे अपने जीवन में शामिल करें।
| Apr 5, 2026, 02:28 IST
चूना क्या है?
चूना पत्थर एक अवसादी चट्टान है, जो मुख्यतः कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) के विभिन्न क्रिस्टलीय रूपों जैसे कि केल्साइट और एरेगोनाइट से बनी होती है। यदि चूने का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों के उपचार में सहायक हो सकता है। आइए जानते हैं चूने के फायदे और इसके उपयोग के तरीके।
चूना के गुण
- चूने के पानी में कैल्शियम और विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है, जो कई रोगों जैसे प्रदर, यक्ष्मा, कील-मुंहासे, कान का दर्द, तिल्ली की वृद्धि, घाव और चेचक में लाभकारी है।
- 30 ग्राम चूने को 70 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर आधा किलो पानी में डालें। इसे कार्कदार शीशी में भरकर बंद करें। जब पानी निथर जाए, तो 15-20 बूंदें दूध के साथ मिलाकर बच्चे को देने से उदर रोग ठीक होते हैं।
- चूने को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से मकड़ी का जहर उतर जाता है।
- 10-12 ग्राम चूने में 30 एम.एल. गोमूत्र मिलाकर मलहम बनाएं, इसे खुजली और घावों पर लगाने से लाभ होता है।
- चूने में थोड़ा शहद मिलाकर कील-मुंहासों पर लगाने से वे जल्दी ठीक हो जाते हैं।
- गहरे घाव पर चूने को मक्खन और सोंठ के साथ मिलाकर लगाने से खून बहना रुक जाता है।
- 2 रत्ती चूने में तुलसी का रस या शहद मिलाकर चाटने से संग्रहणी रोग में लाभ होता है।
- चूने का सेवन प्याज या लहसुन के रस के साथ करने से अमाशय के विजातीय द्रव्य बाहर निकल जाते हैं।
- चेचक के व्रण पर रुई के फाहे को चूने के पानी में भिगोकर रखने से गहरे घाव नहीं पड़ते।
- अजीर्ण के कारण पेशाब रुकने पर दूध में चूने का पानी मिलाकर देने से लाभ होता है।
- चूने के निथरे हुए पानी में दूध मिलाकर कान में डालने से कान का बहना रुक जाता है।
- नीम के पत्तों के रस में चूना मिलाकर कान में डालने से बिच्छू का विष उतर जाता है।
- बच्चे की गुदा में चुन्ने के कीड़े होने पर चूने के पानी की पिचकारी देने से लाभ होता है।
- चूने के निथरे हुए पानी में तिल का तेल और शक्कर मिलाकर देने से मूत्र के समय होने वाला कष्ट दूर होता है।
- अम्लपित्त रोग में चूने के निथरे हुए पानी का सेवन करने से लाभ होता है।
- चूने को शहद के साथ मिलाकर तिल्ली पर लगाने से तिल्ली की वृद्धि समाप्त होती है।
- क्षय रोग में चूने का पानी दूध में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
- यदि किसी औषधि से वमन नहीं रुकता, तो दूध में चूने का पानी मिलाकर देने से रुक जाता है।
- चूने के 20 ग्राम पानी में 100 ग्राम साफ पानी मिलाकर वेजीना को धोने से श्वेत प्रदर दूर होता है।
- चूने और शहद को कपड़े पर लगाकर पसली के दर्द पर रखने से दर्द मिट जाता है।
- चूने में अलसी का तेल मिलाकर जलने पर लगाने से जलन और पीड़ा कम होती है।
- चूने के पानी में गुनगुना दूध और गोंद मिलाकर देने से अतिसार का निवारण होता है।
- चूना, सज्जी, तूतिया और सुहागे को मिलाकर मस्सों पर लगाने से वे कुछ ही दिनों में दूर हो जाते हैं।
- चूने और नौसादर को मिलाकर सुंघाने से सिरदर्द और बेहोशी दूर होती है।
- हल्दी और खाने वाले चूने को मिलाकर रात भर छोड़ने से तिल-मस्से अपने आप गिर जाते हैं।
