नई दिल्ली। चीन, जो खुद को एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है, अब अमेरिका के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है। हालाँकि, ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के चलते उसकी स्थिति भी प्रभावित हुई है। पिछले 15 दिनों में, चीन में पेट्रोल और डीजल की कीमतें दूसरी बार बढ़ाई गई हैं। इस बीच, भारत ने पिछले चार वर्षों से ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे वह इस संकट में स्थिर बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच, चीन ने अपनी राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (एनडीआरसी) के माध्यम से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है। यह नई कीमतें बुधवार से लागू होंगी। इससे पहले, 23 मार्च को भी कीमतों में वृद्धि की गई थी।
कितनी बढ़ी कीमतें
एनडीआरसी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते पेट्रोल की कीमत में 420 युआन (61 डॉलर) प्रति टन और डीजल की कीमत में 400 युआन (58 डॉलर) प्रति टन की वृद्धि की जाएगी। प्रति लीटर के हिसाब से, पेट्रोल की कीमत में 4 रुपये और डीजल में 4.49 रुपये की वृद्धि हुई है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458 रुपये प्रति लीटर और डीजल की 520 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गई है।
उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम
एनडीआरसी ने प्रमुख रिफाइनरियों को उत्पादन बनाए रखने और परिवहन को सुचारु करने के निर्देश दिए हैं ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। आयोग ने बाजार की निगरानी को और सख्त करने का भी आदेश दिया है। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, आयोग ने मूल्य नीति का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात कही है। चीन के पास लगभग चार महीने का आपातकालीन तेल भंडार है।
चीन का आयात भारत से कम
चीन अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 70 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 45 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान का असर चीन की ऊर्जा आपूर्ति पर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम हो सकता है।
