चीन ने सोने की खरीद में नया रिकॉर्ड बनाया, फ्रांस के गोल्ड रिजर्व के करीब पहुंचा
चीन की सोने की खरीदारी का नया रिकॉर्ड
चीन ने एक बार फिर से सोने की खरीद में वृद्धि कर वैश्विक बाजार का ध्यान आकर्षित किया है। सितंबर 2026 में, चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने स्वर्ण भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। यह खरीद पिछले तीन वर्षों में किसी एक महीने में की गई सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। लगातार 23वें महीने सोने की खरीद जारी रखते हुए, चीन ने अपने स्वर्ण भंडार को नए स्तर पर पहुंचा दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने सितंबर में लगभग 23 टन सोना खरीदा। इस खरीद के साथ, देश का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व लगभग 2,410 टन तक पहुंच गया है। साल 2026 के सितंबर तक, चीन की आधिकारिक सोने की खरीद लगभग 103 टन तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
चीन की इस खरीदारी की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सितंबर में सोने की कीमतों में गिरावट के बावजूद केंद्रीय बैंक ने खरीद जारी रखी। आमतौर पर, आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने को एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना रखकर विदेशी मुद्रा और अन्य वित्तीय संपत्तियों पर निर्भरता को संतुलित करने का प्रयास करते हैं। चीन की लगातार खरीदारी को इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
गोल्ड रिजर्व के मामले में, चीन दुनिया के प्रमुख देशों में से एक है। हालांकि, आधिकारिक भंडार के आधार पर, वह अभी भी अमेरिका, जर्मनी, इटली और फ्रांस से पीछे है। चीन के पास लगभग 2,410 टन सोना है, जबकि फ्रांस का आधिकारिक स्वर्ण भंडार इससे थोड़ा अधिक है। इस कारण, चीन और फ्रांस के गोल्ड रिजर्व के बीच का अंतर अब अपेक्षाकृत कम हो गया है। भविष्य में चीन की खरीदारी और अन्य देशों के भंडार में होने वाले बदलाव यह तय करेंगे कि दोनों के बीच स्थिति किस तरह बदलती है।
चीन की इस रणनीति का वैश्विक गोल्ड मार्केट पर भी प्रभाव पड़ सकता है। जब बड़े केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीदते हैं, तो बाजार में आधिकारिक क्षेत्र की मांग को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, सोने की कीमत केवल केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से निर्धारित नहीं होती। अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरें, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की मांग जैसे कई कारक भी इसकी कीमत को प्रभावित करते हैं।
चीन की विदेशी मुद्रा संबंधी रणनीति पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। सितंबर के अंत में, देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर रहा, जो पिछले महीने की तुलना में कम था। ऐसे माहौल में सोने के भंडार में लगातार बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि चीन अपने आधिकारिक रिजर्व में विभिन्न परिसंपत्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है।
कुल मिलाकर, सितंबर में चीन की रिकॉर्ड स्तर की मासिक सोना खरीद उसके लंबे समय से जारी गोल्ड रिजर्व बढ़ाने के अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फ्रांस के करीब पहुंचता उसका स्वर्ण भंडार वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह कहना अभी संभव नहीं है कि चीन कब फ्रांस से आगे निकलेगा, क्योंकि यह आने वाले महीनों में दोनों देशों के आधिकारिक भंडार में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
