चीन का नया सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क: स्टारलिंक को चुनौती देने की तैयारी
चीन का सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क
नई दिल्ली। सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए, चीन ने वैश्विक स्तर पर स्टारलिंक को चुनौती देने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। पिछले पंद्रह दिनों में दो सफल स्पेस लॉन्च के साथ, चीन ने अपने विशाल सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क को स्थापित करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। चीन की योजना 28,000 उपग्रहों के एक बेड़े को अंतरिक्ष में तैनात करने की है, जिसका उपयोग नागरिकों को ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ सैन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी किया जाएगा। वर्तमान में, स्टारलिंक के पास 11,000 से अधिक उपग्रह हैं, जिससे चीन का यह नेटवर्क आकार में स्टारलिंक से भी बड़ा होगा।
चीन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अपने दो प्रमुख नेटवर्क—'गुओवांग' और 'कियानफान' के माध्यम से लागू कर रहा है। गुओवांग का संचालन चीन की सरकारी कंपनी 'चीन सैटेलाइट नेटवर्क ग्रुप' द्वारा किया जा रहा है, जो मुख्य रूप से सरकारी और सैन्य कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इस नेटवर्क के तहत 13,000 उपग्रहों को लॉन्च किया जाना है, जिनमें से 222 पहले ही कक्षा में स्थापित किए जा चुके हैं। दूसरी ओर, शंघाई स्पेससेल टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित कियानफान नेटवर्क के माध्यम से 15,000 उपग्रह तैनात किए जाएंगे, जो आम जनता को स्टारलिंक जैसी वाणिज्यिक इंटरनेट सेवाएं प्रदान करेगा। इसके 248 उपग्रह पहले ही अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं।
तकनीकी दृष्टिकोण से, चीन का यह सैटेलाइट नेटवर्क 800 से 1200 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जा रहा है, जो स्टारलिंक की लगभग 550 किलोमीटर की ऊंचाई से अधिक है। इस स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर के पूर्ण होने पर उपयोगकर्ताओं को 40 से 80 मिलीसेकंड की कम लेटेंसी के साथ 300 Mbps तक की उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलेगी।
जहां एक ओर चीन अपने स्वदेशी उपग्रहों के माध्यम से अंतरिक्ष में नेटवर्क स्थापित कर रहा है, वहीं भारत में अभी भी स्टारलिंक की सेवाओं का इंतजार किया जा रहा है। भारत में स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क विकसित करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से रिलायंस जियो पर है, जिसने भी भविष्य में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए उपग्रहों की लॉन्चिंग की योजना बनाई है।
