चीन का उन्नत सैटेलाइट ईरान के सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने चीन के उन्नत सैटेलाइट का उपयोग अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए किया है। यह सैटेलाइट, ‘TEE-01B’, आधे मीटर के रिज़ॉल्यूशन पर तस्वीरें खींचने में सक्षम है, जिससे ईरान को अपने सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन और ईरान के बीच सैन्य सहयोग बढ़ रहा है, जो वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है।
 | 
gyanhigyan

मध्य पूर्व में तनाव और नई रिपोर्ट

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। एक प्रमुख समाचार पत्र के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले करने के लिए चीन द्वारा निर्मित एक उन्नत जासूसी सैटेलाइट का उपयोग किया है। यह जानकारी बीजिंग और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को दर्शाती है।


‘TEE-01B’: युद्ध की दिशा बदलने वाला सैटेलाइट

इस रिपोर्ट में ‘TEE-01B’ नामक सैटेलाइट का उल्लेख किया गया है, जिसे चीन की ‘अर्थ आई’ कंपनी ने विकसित किया है।


इन-ऑर्बिट डिलीवरी: चीन ने इस सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद सीधे ईरान को सौंप दिया।


अत्यधिक उन्नत तकनीक: जबकि ईरान का सबसे उन्नत सैटेलाइट ‘नूर-3’ केवल 5 मीटर के रिज़ॉल्यूशन तक सीमित था, ‘TEE-01B’ आधे मीटर (0.5 मीटर) के रिज़ॉल्यूशन पर तस्वीरें ले सकता है।


क्षमता: इस तकनीक के कारण विशेषज्ञ न केवल सैन्य ठिकानों, बल्कि वहां खड़े विमानों, वाहनों और बुनियादी ढांचे में हुए मामूली बदलावों की पहचान कर सकते हैं।


अमेरिकी ठिकानों पर निगरानी

इस सैटेलाइट का उपयोग अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर नजर रखने के लिए किया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत IRGC को चीन की सैटेलाइट कंट्रोल कंपनी द्वारा संचालित कमर्शियल ग्राउंड स्टेशनों तक पहुंच दी गई थी।


इस सैटेलाइट ने 13, 14 और 15 मार्च को सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस की तस्वीरें खींची थीं, जिस पर उसी दौरान ईरान ने हमला किया था। इसके अलावा, इसने जॉर्डन में मुवफ़्फ़क़ साल्टी एयर बेस और बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे की भी निगरानी की।


बेहद उन्नत सैटेलाइट की विशेषताएँ

इस सैटेलाइट में लगभग आधे मीटर के रिज़ॉल्यूशन पर तस्वीरें खींचने की क्षमता है, जिससे विशेषज्ञ किसी विमान, वाहनों और बुनियादी ढांचे में हुए बदलावों की पहचान कर सकते हैं। ‘TEE-01B’ से पहले, IRGC का सबसे उन्नत सैटेलाइट ‘नूर-3’ माना जाता था।


ईरान मामलों की विशेषज्ञ ने कहा कि इस सैटेलाइट का उपयोग स्पष्ट रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, क्योंकि इसे IRGC की एयरोस्पेस फ़ोर्स चला रही है।


चीन-ईरान सहयोग

कई रिपोर्टों में कहा गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से चीन, ईरान की मदद कर रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि चीन, ईरान को और हथियार दे सकता है।


हालांकि चीन ने इस बात से इनकार किया है कि वह ईरान की मदद कर रहा है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बीजिंग लंबे समय से तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का समर्थन करता रहा है।