चटगांव में चिन्मय दास को मिली जमानत, लेकिन जेल में रहेंगे
चिन्मय दास को जमानत, फिर भी जेल में रहना होगा
चटगांव की अदालत ने आध्यात्मिक नेता और इस्कॉन के पूर्व प्रवक्ता चिन्मय दास को एक मामले में जमानत प्रदान की है, लेकिन उनकी जेल से रिहाई अभी संभव नहीं है। इसके पीछे कारण यह है कि उनके खिलाफ अभी भी छह अन्य मामले चल रहे हैं, जिनमें एक हत्या का गंभीर मामला भी शामिल है। न्यायिक मजिस्ट्रेट शखावत हुसैन ने सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट के कर्मचारी मिजानुर रहमान ने बताया कि चिन्मय की ओर से दायर जमानत याचिका को मंजूरी दी गई है।
जमानत का मामला और आरोप
जिन मामलों में चिन्मय को जमानत मिली है, वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता मीर मोहम्मद नासिर उद्दीन द्वारा दर्ज कराया गया था। इसमें चिन्मय पर जमीन पर कब्जा करने, लोगों को धमकाने और मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला चट्टोग्राम के हथहजारी उपजिला के मेखल इलाके से संबंधित है और 2023 में दर्ज किया गया था। इस मामले में कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था, और पुलिस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (PBI) ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी।
हत्या के लिए उकसाने का आरोप
हालांकि, चिन्मय के खिलाफ अन्य मामले अभी भी चल रहे हैं, जिनमें सबसे गंभीर मामला वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या का है। अलिफ की हत्या 26 नवंबर 2024 को चटगांव कोर्ट के बाहर हुई थी, जब उन पर हमला किया गया था। पुलिस की चार्जशीट में कहा गया है कि यह घटना चिन्मय के उकसाने के बाद हुई।
वकील की हत्या का घटनाक्रम
जब चिन्मय की जमानत खारिज हुई, तो उनके समर्थकों ने जेल वैन को रोककर रिहाई की मांग की। पुलिस द्वारा भीड़ को हटाने की कोशिश के दौरान झड़पें हुईं, जिसमें अलिफ की हत्या हो गई। इसके बाद पुलिस ने तोड़फोड़, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस पर हमले के आरोप में तीन और मामले दर्ज किए। इन मामलों में 79 लोगों के नाम शामिल हैं, जबकि लगभग 1400 अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। अलिफ के पिता ने 31 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है।
