घरेलू बाजारों में गिरावट की आशंका, ईरान संकट का असर

सोमवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजारों के लिए नकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण अनिश्चितता को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे तेल से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और महंगाई दर में वृद्धि होगी। इस स्थिति में निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है। जानें बाजार की वर्तमान स्थिति और विशेषज्ञों की राय।
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घरेलू बाजारों में गिरावट की आशंका, ईरान संकट का असर

बाजार की वर्तमान स्थिति

घरेलू बाजारों में गिरावट की आशंका, ईरान संकट का असर

सोमवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजारों के लिए संकेत नकारात्मक हो सकते हैं। दरअसल, शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में गिरावट देखी गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जारी है। यह स्थिति ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई है, जिससे अनिश्चितता बढ़ रही है।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका पश्चिम एशिया में हजारों सैनिक भेजने की योजना बना रहा है, जो दर्शाता है कि उनकी प्रारंभिक रणनीति सफल नहीं रही। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर ब्रेंट के लिए 110 डॉलर के पार पहुंच गई हैं, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है। इस प्रकार, बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है और निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है।

बाजार की स्थिति

अमेरिकी बाजारों के तीन प्रमुख इंडेक्स में तेज गिरावट आई है। नैस्डेक में 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, जबकि एसएंडपी 500 और डाओजोंस में क्रमशः 1 प्रतिशत और आधा प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। ये तीनों इंडेक्स लगातार चौथे सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं और अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज से नीचे हैं। एनवाईएसई पर गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों की तुलना में चार गुना अधिक रही।

कच्चे तेल की कीमतों में भी वृद्धि जारी है, ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के स्तर को पार कर चुका है, जबकि डब्लूटीआई का भाव 98 डॉलर के करीब है। ट्रेडर्स के डर को दर्शाने वाला वोलेटिलिटी इंडेक्स भी 25 के स्तर को पार कर गया है।

विशेषज्ञों की राय

रिपोर्टों के अनुसार, बदलती परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व के सामने चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे तेल से न केवल अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि महंगाई दर में भी वृद्धि होगी। इससे केंद्रीय बैंकों को धीमी वृद्धि और उच्च महंगाई की कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। बाजार में हुए सर्वेक्षण के अनुसार, ट्रेडर्स अब दरों में अगली कटौती को अगले वर्ष होने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कुछ ट्रेडर्स इस साल दरों में वृद्धि की संभावना जता रहे हैं। इस प्रकार, बाजार दरों को लेकर और अधिक अनिश्चित हो गया है.