ग्लॉ झील को मिला रामसर स्थल का दर्जा, जैव विविधता संरक्षण में होगी वृद्धि

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने लोहित जिले की ग्लॉ झील को अंतरराष्ट्रीय रामसर स्थल का दर्जा मिलने की घोषणा की। यह मान्यता जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने और स्थायी आजीविका को प्रोत्साहित करने में सहायक होगी। खांडू ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री यादव का आभार व्यक्त किया। झील का क्षेत्र 150 से अधिक प्रकार के पेड़ों और 49 प्रकार के ऑर्किड का निवास है, जो इसे पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
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ग्लॉ झील की अंतरराष्ट्रीय मान्यता

ईटानगर, चार अगस्त: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बताया कि लोहित जिले में स्थित ग्लॉ झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिलने से जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थायी आजीविका को प्रोत्साहन मिलेगा। खांडू ने इसे राज्य के पारिस्थितिक संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।


यादव ने सोमवार को यह घोषणा की कि यह साफ पानी वाला जलाशय भारत का 101वां रामसर स्थल बन गया है। खांडू ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ग्लॉ झील को अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल बनने पर गर्व है। यह मान्यता जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करेगी, स्थायी आजीविका को बढ़ावा देगी और आने वाली पीढ़ियों को हमारे अनमोल पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए प्रेरित करेगी।'


ग्लॉ झील पूर्वी हिमालय में कामलांग बाघ रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है, जो घने और पुराने जंगलों से घिरी हुई है।


यह झील पहाड़ों से साल भर बहने वाली धाराओं से जल प्राप्त करती है। इसके आस-पास का क्षेत्र 150 से अधिक प्रकार के पेड़ों और 49 प्रकार के ऑर्किड का निवास स्थान है, जो इसे पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है। रामसर संधि एक अंतर-सरकारी पर्यावरण संधि है, जिसकी शुरुआत 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में दलदल, कच्छ-भूमि और झीलों जैसी आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए की गई थी।