गृह मंत्री अमित शाह ने जनसंख्या बदलाव पर उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया

गृह मंत्री अमित शाह ने आज जनसंख्या में हो रहे परिवर्तनों पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने आयोग को सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या के बदलावों का अध्ययन करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य अवैध आप्रवासन और अन्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का आकलन करना है। समिति में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। जानें इस समिति के कार्य और इसके महत्व के बारे में।
 | 
गृह मंत्री अमित शाह ने जनसंख्या बदलाव पर उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया gyanhigyan

आबादी में बदलाव पर बैठक

गृह मंत्री अमित शाह ने आज जनसंख्या में हो रहे परिवर्तनों पर एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान, उन्होंने आयोग को निर्देश दिया कि सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या के बदलावों का अध्ययन किया जाए। बैठक में, श्री शाह ने आयोग को मेट्रो शहरों और औद्योगिक कस्बों का दौरा करने के लिए भी कहा ताकि स्थिति का सही आकलन किया जा सके। पिछले महीने, केंद्र सरकार ने अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से जनसंख्या में हो रहे परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था।


समिति की संरचना और कार्य

अधिकारियों के अनुसार, शाह ने समिति की बैठक में कहा कि उसे अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे परिवर्तनों का आकलन करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों, मेट्रो शहरों और औद्योगिक कस्बों का दौरा करना चाहिए। इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर हैं। समिति में जनगणना आयुक्त, रिटायर्ड IAS अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व IPS अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि भी शामिल हैं।


जनसांख्यिकीय बदलाव का महत्व

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-I) इस समिति के सदस्य सचिव हैं। शाह ने समिति के गठन की घोषणा करते हुए कहा था कि जनसांख्यिकीय बदलाव एक गंभीर मुद्दा है, जो देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक ढांचे में बदलाव और आदिवासी समाज के संरक्षण से जुड़ा है।


समिति का उद्देश्य

उन्होंने कहा कि यह समिति अवैध आव्रजन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक आकलन करेगी। यह धार्मिक और सामाजिक समुदायों में असामान्य जनसंख्या बदलावों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी और इसके लिए एक योजनाबद्ध समाधान पेश करेगी। सरकार के एक बयान में कहा गया है कि यह समिति देश के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध आव्रजन और अन्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी और उपयुक्त नीतिगत उपाय सुझाएगी।