गुरुग्राम अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली का मामला, परिजनों का हंगामा
गुरुग्राम में सड़क हादसे के बाद अस्पताल की कथित वसूली
गुरुग्राम के सेक्टर-49 में स्थित एक अस्पताल में एक युवक की सड़क दुर्घटना के बाद मौत हो गई, जिसके बाद इलाज के नाम पर कथित रूप से पैसे वसूले जाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने युवक की मौत के बावजूद उसे जिंदा बताकर तीन दिनों में 5 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूल की। जब परिवार ने उसे दूसरे अस्पताल (AIIMS) में स्थानांतरित करने की कोशिश की, तब अस्पताल ने मौत की सूचना दी और AIIMS रेफर करने के लिए डेढ़ लाख रुपये और मांगे।
परिजनों का हंगामा और अस्पताल के खिलाफ नारेबाजी
बुधवार की रात, परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और उचित कार्रवाई की मांग की।
मामले का विवरण
परिजनों के अनुसार, युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था और उसे पार्क अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का दावा है कि युवक की मौत 24 घंटे के भीतर हो गई थी, लेकिन अस्पताल ने उसे जिंदा बताकर इलाज जारी रखा और बिल बढ़ाते रहे। तीन दिनों में 5 लाख रुपये से अधिक की राशि ली गई।
जब परिवार ने बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में जाने की बात की, तब अस्पताल ने युवक की मौत की पुष्टि की और AIIMS रेफर करने के नाम पर अतिरिक्त 1.5 लाख रुपये की मांग की। परिवार ने इसे पैसे वसूलने की साजिश बताया।
अस्पताल का बयान और पुलिस की कार्रवाई
अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया।
परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ मेडिकल निगरानी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि अन्य मरीजों के साथ ऐसा न हो।
यह मामला गुरुग्राम में निजी अस्पतालों द्वारा अधिक बिलिंग और मेडिकल लूट के विवादों को फिर से उजागर कर रहा है।
पुलिस जांच की शुरुआत
सेक्टर-49 थाने की पुलिस ने परिजनों की शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में अस्पताल के डॉक्टरों, बिलिंग विभाग और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि क्या निजी अस्पतालों में मरीज की जान से ज्यादा बिलिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। डिजिटल युग में भी मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता और नैतिकता की आवश्यकता को यह मामला उजागर करता है।
