गुरमीत राम रहीम को हाई कोर्ट से मिली बड़ी कानूनी जीत, पत्रकार हत्या मामले में बरी
गुरमीत राम रहीम की कानूनी जीत
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को शनिवार को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से एक महत्वपूर्ण कानूनी सफलता मिली है। अदालत ने 2002 में हुए पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के हत्या मामले में उन्हें बरी कर दिया। यह निर्णय न्यायाधीशों की एक बेंच द्वारा सुनाया गया, जिसने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया।
यह फैसला उस समय आया है जब एक विशेष CBI अदालत ने सिरसा के डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने बताया कि उच्च न्यायालय ने पहले के निर्णय को पलटते हुए उन्हें पत्रकार की हत्या से जुड़े सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
2002 पत्रकार हत्या मामला
छत्रपति के परिवार ने 2003 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई थी। इसके बाद जांच CBI को सौंपी गई, जिसने जुलाई 2007 में चार्जशीट दाखिल की। अगस्त 2017 में, डेरा प्रमुख को पंचकूला कोर्ट में लाया गया, जहां CBI कोर्ट के जज ने रेप केस में अपना फैसला सुनाया।
छत्रपति परिवार की प्रतिक्रिया
इस निर्णय से पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिवार को गहरा सदमा लगा है। उनके बेटे अंशुल छत्रपति, जो पिछले दो दशकों से इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, ने संकेत दिया है कि वे उच्च न्यायालय के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना बना सकते हैं।
राम रहीम को मिली यह राहत डेरा समर्थकों के लिए एक उत्सव का कारण है, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष कर रहे पीड़ित परिवारों के लिए यह एक निराशाजनक मोड़ है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या CBI या पीड़ित परिवार इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे।
