गुरमीत राम रहीम को मिली 40 दिन की नई पैरोल, विवादों का केंद्र बना

गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल मिली है, जो उनके बार-बार रिहा होने के कारण विवादों का विषय बन गई है। सिख संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है, यह आरोप लगाते हुए कि एक गंभीर अपराधी को बार-बार पैरोल देना कानून के खिलाफ है। चुनावों के समय राम रहीम की रिहाई अक्सर राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन जाती है, खासकर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में। जानें इस मामले में प्रशासन की स्थिति और कानूनी विशेषज्ञों की राय।
 | 
गुरमीत राम रहीम को मिली 40 दिन की नई पैरोल, विवादों का केंद्र बना

गुरमीत राम रहीम की पैरोल पर नया विवाद

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 40 दिनों की पैरोल दी गई है। सूत्रों के अनुसार, यह जानकारी रविवार को सामने आई। राम रहीम वर्तमान में रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी दो शिष्याओं के बलात्कार और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।


पैरोल की आवृत्ति पर उठे सवाल

हाल के वर्षों में राम रहीम को मिलने वाली पैरोल की संख्या ने नई बहस को जन्म दिया है। यह ताजा पैरोल पिछले साल अगस्त में मिली 40 दिनों की छुट्टी के कुछ ही महीनों बाद आई है। पिछले एक साल में, उसे जनवरी में 30 दिन, अप्रैल में 21 दिन (फरलो) और अगस्त में 40 दिन की रिहाई मिल चुकी है। 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से यह 15वीं बार है जब डेरा प्रमुख को अस्थायी रिहाई मिली है।


सिख संगठनों की आपत्ति

राम रहीम की बार-बार रिहाई पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जैसे सिख संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। इन संगठनों का कहना है कि एक गंभीर अपराधी को बार-बार पैरोल देना कानून की भावना के खिलाफ है। आलोचकों का मानना है कि चुनावों के समय राम रहीम की रिहाई अक्सर राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन जाती है, खासकर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों की संख्या काफी अधिक है।


प्रशासन की स्थिति

विशेष रूप से हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र और हिसार जैसे जिलों में डेरा का प्रभाव काफी मजबूत है। प्रशासन का कहना है कि पैरोल जेल नियमों के तहत दी जाती है, लेकिन बार-बार जेल से बाहर आने की इस प्रक्रिया ने कानूनी विशेषज्ञों और विपक्षी दलों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं।