गुजरात में नशे के लिए सांपों की तस्करी का भंडाफोड़
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी का खुलासा
गुजरात की अपराध शाखा और वन विभाग ने मिलकर नवरंगपुरा में एक फ्लैट पर छापेमारी की, जहां एक अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी और ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ। एक छोटे से कमरे में 50 से अधिक विदेशी सांपों और दुर्लभ जानवरों को रखा गया था, जिनका इस्तेमाल जहर निकालने और हाई-प्रोफाइल रेव पार्टियों में नशा सप्लाई करने के लिए किया जा रहा था।
जहर का व्यापार
जांच में यह भी पता चला कि यह गिरोह केवल जानवरों की तस्करी नहीं कर रहा था, बल्कि उनके जहर का भी व्यापार कर रहा था। अहमदाबाद, गांधीनगर और खेड़ा में गुप्त रेव पार्टियों में सांप के जहर की भारी मांग थी। एक खुराक की कीमत 50,000 रुपये तक थी, और लोग नशे के लिए सांपों को खुद को काटने या जहर को सीधे रक्त में इंजेक्ट करने के लिए तैयार थे।
अरेस्ट और बरामदगी
पुलिस ने मुख्य आरोपी मणिकनंदन नादर (41) को गिरफ्तार किया है। छापेमारी में केवल सांप ही नहीं, बल्कि कई दुर्लभ जानवर भी बरामद हुए, जिनमें 50 विभिन्न प्रजातियों के जहरीले सांप, लाल हाथ वाला टैमरिन बंदर, अफ्रीकी ग्रे तोते, नीले-सुनहरे मैकाऊ तोते, फारसी बिल्लियां और नीदरलैंड के बौने खरगोश शामिल हैं।
संभावित अंतर्राज्यीय गिरोह
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह एक अंतर्राज्यीय गिरोह है, जिसके तार चेन्नई और अन्य बंदरगाहों से जुड़े हो सकते हैं। आशंका है कि इन जानवरों को अवैध तरीके से भारत में लाया गया। कुछ सांपों को दवा कंपनियों को भी बेचा गया था, जबकि जहर को ड्रग सिंडिकेट को सप्लाई किया जा रहा था।
कई एजेंसियों की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए कई एजेंसियां एक साथ जांच कर रही हैं। वन विभाग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन की जांच कर रहा है, जबकि सीमा शुल्क विभाग विदेशी प्रजातियों के अवैध आयात-निर्यात के रास्तों की तलाश कर रहा है। नगर निगम (AMC) इन जानवरों से फैलने वाली बीमारियों के खतरे का आकलन कर रहा है। साइबर सेल आरोपी के डिजिटल डिवाइस और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
