गिग वर्कर्स ने ईंधन की कीमतों के खिलाफ हड़ताल का किया आह्वान

गिग वर्कर्स ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ अस्थायी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल का उद्देश्य सरकार और ऐप कंपनियों को बढ़ती महंगाई और कम भुगतान के मुद्दों के प्रति जागरूक करना है। ड्राइवरों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें उनकी कमाई को प्रभावित कर रही हैं। जानें इस आंदोलन के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
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गिग वर्कर्स ने ईंधन की कीमतों के खिलाफ हड़ताल का किया आह्वान gyanhigyan

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि पर गिग वर्कर्स की प्रतिक्रिया

हाल ही में सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के चलते लोगों में असंतोष बढ़ गया है। इस संदर्भ में, गिग वर्कर्स ने शनिवार को एक अस्थायी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस हड़ताल के दौरान, ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स से दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक अपनी सेवाएं बंद रखने का अनुरोध किया गया है।


यूनियन का समर्थन

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन ने श्रमिकों से इस हड़ताल में भाग लेने की अपील की है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन की कीमतें और कम भुगतान दरें हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए रोजी-रोटी का संकट पैदा कर रही हैं।


सोशल मीडिया पर आंदोलन की अपील

यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि ‘GIPSWU सभी गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स से अनुरोध करता है कि वे ईंधन की बढ़ती कीमतों और कम भुगतान के खिलाफ दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद रखें’।


ईंधन की कीमतों में वृद्धि

यह विरोध प्रदर्शन तेल कंपनियों द्वारा ईंधन की कीमतों में लगभग 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि के खिलाफ हो रहा है। हाल ही में, सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके परिणामस्वरूप, दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।


ड्राइवरों की चिंताएं

ऐप आधारित कैब ड्राइवर मोहम्मद ने कहा कि जब भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, उनका खर्च तुरंत बढ़ जाता है, लेकिन किराए में उतनी वृद्धि नहीं होती। उन्होंने बताया कि कमीशन और ईंधन के खर्च के बाद बहुत कम पैसा बचता है।


तेल कंपनियों पर दबाव

तेल कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार, हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, वे अपनी लागत पूरी तरह से वसूल नहीं कर पा रही हैं। क्रिसिल का अनुमान है कि सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।


अस्थायी हड़ताल का उद्देश्य

गिग वर्कर्स का कहना है कि इस अस्थायी हड़ताल का उद्देश्य सरकार और ऐप कंपनियों को यह संदेश देना है कि बढ़ती महंगाई और कम भुगतान के बीच उनके लिए परिवार चलाना कठिन हो रहा है। उनका मानना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो भविष्य में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।