गिग वर्कर्स की हड़ताल: 20 रुपये प्रति किलोमीटर की मांग
गिग वर्कर्स की हड़ताल का ऐलान
शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक गिग वर्कर्स हड़ताल पर रहेंगे। इन श्रमिकों ने प्रति किलोमीटर 20 रुपये के नए किराए की मांग की है, जिससे खाद्य वितरण सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। श्रमिकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और दैनिक खर्चों में वृद्धि के कारण उनकी वर्तमान आय अब अव्यवहारिक हो गई है। उन्होंने एग्रीगेटर कंपनियों से बेहतर वेतन और कार्य परिस्थितियों की मांग की है।
खाद्य वितरण सेवाओं पर असर
विरोध प्रदर्शन के चलते कई शहरों में खाद्य वितरण सेवाओं में बाधा आने की संभावना है। कई श्रमिक इस आंदोलन में भाग ले रहे हैं, जिससे ग्राहकों को डिलीवरी में देरी या सेवाओं की कमी का सामना करना पड़ सकता है। स्विगी, ज़ोमैटो, ब्लिंकइट, ज़ेप्टो, ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों से जुड़े लाखों कर्मचारी अपनी आजीविका के लिए साइकिल और स्कूटर पर निर्भर हैं। यूनियन का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण उनकी दैनिक बचत लगातार घट रही है।
यूनियन की मांगें
यूनियन ने कंपनियों से गिग वर्कर्स के लिए न्यूनतम सेवा दर 20 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो ईंधन की लागत तुरंत बढ़ जाती है, लेकिन कंपनियां डिलीवरी शुल्क में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं करती हैं। जीआईपीएसडब्लू की अध्यक्ष सीमा सिंह ने बताया कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक काम करने वाले डिलीवरी कर्मचारी पहले से ही दबाव में हैं।
भविष्य की चेतावनी
सीमा सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनियां भुगतान बढ़ाने का निर्णय नहीं लेती हैं, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। राष्ट्रीय समन्वयक निर्मल गोराना ने बताया कि देश में लगभग 1 करोड़ 20 लाख गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर हैं, जिनमें फूड डिलीवरी, ग्रोसरी डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और कैब सेवाओं से जुड़े श्रमिक शामिल हैं।
