गायत्री देवी: प्यार और साहस की अद्भुत कहानी

गायत्री देवी, जयपुर राजघराने की महारानी, ने शिक्षा के माध्यम से पर्दा प्रथा को समाप्त किया और राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रेम कहानी, जो 12 वर्ष की आयु में शुरू हुई, और उनके साहसिक कार्य आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। जानें उनके जीवन के अनोखे किस्से और संघर्षों के बारे में।
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गायत्री देवी: प्यार और साहस की अद्भुत कहानी gyanhigyan

गायत्री देवी: एक प्रेरणादायक जीवन

गायत्री देवी, जयपुर के राजघराने की महारानी, ने शिक्षा के माध्यम से पर्दा प्रथा को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कई बार सांसद रहीं और इंदिरा गांधी की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मानी जाती थीं। आज, यदि वे जीवित होतीं, तो 107 वर्ष की होतीं। उनकी जन्म जयंती (23 मई) पर, हम उनके जीवन के प्यार के किस्सों पर नजर डालते हैं, जिन्होंने 12 वर्ष की आयु में प्रेम और 21 वर्ष की आयु में विवाह किया।


राजकुमारी का जन्म और शिक्षा

गायत्री देवी का जन्म 23 मई 1919 को लंदन में हुआ। वे कूच बिहार के राज परिवार की राजकुमारी थीं। उनके पिता महाराजा जितेंद्र नारायण और मां इंदिरा राजे बड़ौदा की राजकुमारी थीं। उनका बचपन सुखद था, और उन्होंने लंदन, स्विट्जरलैंड और भारत में शिक्षा प्राप्त की। वे घुड़सवारी और खेलों में निपुण थीं, और उनकी मां ने उन्हें स्वतंत्रता और आधुनिकता का महत्व सिखाया।


राजा मान सिंह से पहली मुलाकात

1931 या 1932 में, जब गायत्री देवी 12 वर्ष की थीं, महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय कलकत्ता में पोलो खेलने आए। वे गायत्री देवी के परिवार के घर ठहरे थे। मान सिंह पहले से ही दो बार शादी कर चुके थे, लेकिन गायत्री देवी ने उन्हें पहली बार देखकर ही प्यार कर लिया।


प्यार की शुरुआत

गायत्री देवी ने मान सिंह को अपना हीरो मान लिया। उम्र के अंतर के बावजूद, उनका प्यार बढ़ता गया। गायत्री देवी की मां को यह रिश्ता पसंद नहीं था, लेकिन प्यार ने उन्हें रोक नहीं पाया। दोनों ने अपने प्यार को छुपाकर रखा और टेनिस और साइकिल रेस के बहाने मिलते रहे।


शादी का प्रस्ताव

जब गायत्री देवी 16 वर्ष की हुईं, मान सिंह ने उन्हें पार्क में शादी का प्रस्ताव दिया। उन्होंने अपनी मां से पहले ही बात कर ली थी। गायत्री देवी ने हां कर दी, हालांकि उनकी मां खुश नहीं थीं।


ऐतिहासिक शादी

9 मई 1940 को, गायत्री देवी की शादी हुई, जो इतिहास की सबसे महंगी शादियों में से एक मानी जाती है। शादी भव्य थी और गायत्री देवी जयपुर की तीसरी महारानी बनीं।


पर्दा प्रथा का अंत

गायत्री देवी ने राजा मान सिंह की मदद से लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से पर्दा प्रथा को समाप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


राजनीति में कदम

गायत्री देवी ने राजनीति में कदम रखा और 1962 में लोकसभा चुनाव जीते। वे इंदिरा गांधी की कट्टर विरोधी थीं और 1975 में इमरजेंसी के दौरान उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया।


गायत्री देवी का निधन

गायत्री देवी का निधन 2009 में हुआ। वे एक प्रेरणादायक महिला थीं, जिन्होंने राजस्थान को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।