गाजियाबाद में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए पुलिस का अभियान

गाजियाबाद में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान एक वायरल वीडियो ने विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में दिख रही रोशनी खातून ने बताया कि पुलिस ने उनसे पहचान पत्र मांगा, लेकिन किसी मशीन का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने पुलिस के व्यवहार को अनुचित नहीं बताया। इस मामले पर एआईएमआईएम के नेता ओवैसी ने भी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने पुलिसकर्मी के खिलाफ नफरत और भेदभाव का आरोप लगाया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और रोशनी का बयान।
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गाजियाबाद में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए पुलिस का अभियान

गाजियाबाद में नागरिकता जांच का विवाद

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एक अभियान तेजी से चल रहा है। इस दौरान, पुलिस द्वारा नागरिकता की जांच के लिए एक मशीन का उपयोग करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो में दिखाई दे रही महिला, रोशनी खातून, ने इस फुटेज की सच्चाई को स्पष्ट किया है। एक निजी चैनल से बातचीत में उन्होंने बताया कि पुलिस उनके क्षेत्र में आई थी और उनसे पहचान पत्र मांगे थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों के पास कोई मशीन नहीं थी और न ही किसी मशीन का उपयोग किया गया।


रोशनी ने यह भी बताया कि वह बिहार की निवासी हैं और वीडियो में उनके साथ दिख रहे व्यक्ति उनके देवर हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शुरुआत में उनसे डराने-धमकाने वाले लहजे में पूछताछ की, लेकिन बाद में बातचीत का माहौल हल्का हो गया। उनका पूरा परिवार वर्षों से गाजियाबाद की झुग्गी बस्ती में रह रहा है और वे अररिया जिले के मूल निवासी हैं। उन्होंने पुलिस के व्यवहार को अनुचित नहीं बताया और कहा कि उन्हें अनावश्यक रूप से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।


वायरल वीडियो में गाजियाबाद पुलिस रोशनी के बगल में खड़े व्यक्ति से उसका पहचान पत्र मांगती नजर आ रही है। जब उसने बताया कि वह बिहार का निवासी है, तो एक पुलिस अधिकारी ने मजाक में कहा कि उनके पास एक मशीन है जो यह सत्यापित कर सकती है कि वह वास्तव में कहां का निवासी है।


ओवैसी की प्रतिक्रिया

इस वायरल वीडियो पर एआईएमआईएम के नेता ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्विटर पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि गाजियाबाद पुलिसकर्मी ने व्यक्ति की राष्ट्रीयता की जांच के लिए उपकरण का इस्तेमाल किया और उसे बताया कि वह 'बांग्लादेश का है'। ओवैसी ने कहा कि यही उपकरण पुलिसकर्मी के सिर पर भी लगाया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उसके दिमाग में मस्तिष्क है या नहीं। यह नफरत और सांप्रदायिक भेदभाव का स्पष्ट उदाहरण है, क्योंकि पीड़ित का नाम मोहम्मद सादिक है, जो बिहार के अररिया का निवासी है।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो