गाजियाबाद में यमुना और हिंडन नदी के किनारे अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन का बड़ा अभियान
गाजियाबाद में अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई
गाजियाबाद: यदि आपने यमुना या हिंडन नदी के किनारे कोई प्लॉट खरीदा है या वहां मकान बनवाया है, तो यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है। गाजियाबाद जिला प्रशासन ने इन नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। कलेक्ट्रेट में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने स्पष्ट किया कि यमुना और हिंडन नदी की मूल भूमि की पहचान की जाएगी और वहां मौजूद अवैध कब्जों का पता लगाया जाएगा। इसके बाद, नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए भूमि को मुक्त कराया जाएगा.
इस प्रक्रिया में प्रशासन केवल वर्तमान स्थिति का आकलन नहीं करेगा, बल्कि राजस्व अभिलेखों, सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड और पुराने मानचित्रों के आधार पर यह निर्धारित करेगा कि नदी की वास्तविक सीमा कहां तक थी और किन स्थानों पर समय के साथ कब्जे हुए हैं। इसका मतलब है कि ऐसे प्लॉट, फार्महाउस, मकान या बस्तियां जो वर्षों से आबाद हैं, लेकिन नदी क्षेत्र की भूमि पर स्थित हैं, जांच के दायरे में आ सकती हैं.
किस क्षेत्रों में हो सकती है चिंता?
हालांकि प्रशासन ने अभी तक किसी विशेष कॉलोनी का नाम नहीं लिया है, लेकिन हिंडन और यमुना के किनारे कई इलाके पहले भी अतिक्रमण और बाढ़ क्षेत्र में निर्माण के लिए चर्चा में रहे हैं। संभावित रूप से जांच और सर्वेक्षण के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में कई स्थान शामिल हो सकते हैं.
क्या आपका प्लॉट भी खतरे में है?
गाजियाबाद और एनसीआर में वर्षों से सस्ते प्लॉट और अनधिकृत कॉलोनियों का बड़ा बाजार रहा है, जो आज भी सक्रिय है। कई लोगों ने बिना पूरी जांच के नदी किनारे या खादर क्षेत्र में भूमि खरीद ली है। यदि प्रशासन पुराने रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई करता है, तो ऐसे खरीदारों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हाल के वर्षों में नदी किनारे भूमि खरीदने वाले लोगों को अपने प्लॉट के राजस्व रिकॉर्ड, खतौनी, नक्शा और भूमि की कानूनी स्थिति की जांच करनी चाहिए.
डीएम ने सख्त निर्देश क्यों दिए?
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि यमुना और हिंडन केवल जल स्रोत नहीं हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन का आधार भी हैं। नदी क्षेत्र में अतिक्रमण से प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित होता है, जिससे बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ता है। प्रशासन का मानना है कि नदी की भूमि पर अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं, बल्कि भविष्य में लोगों की जान और संपत्ति के लिए भी खतरा बन सकते हैं। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को संयुक्त सर्वेक्षण, ऑन-स्पॉट जांच और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आने वाले हफ्तों में नदी किनारे के क्षेत्रों में प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। जो लोग हिंडन या यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों में रहते हैं या वहां संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह समय सतर्क रहने का है। प्रशासन की नजर अब नदी की एक-एक इंच भूमि पर है और सर्वेक्षण के बाद जहां भी अवैध कब्जा पाया जाएगा, वहां कार्रवाई की जाएगी.
