गाजियाबाद में किशोर की हत्या के बाद मुठभेड़ पर राजनीतिक विवाद
गाजियाबाद में हत्या के मुख्य आरोपी की मुठभेड़ में मौत
गाजियाबाद में एक किशोर की ईद के दिन हत्या के मुख्य संदिग्ध की पुलिस मुठभेड़ में मौत ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में मुठभेड़ें धार्मिक आधार पर चयनात्मक तरीके से की जा रही हैं। 17 वर्षीय सूर्य प्रताप चौहान की हत्या के मुख्य संदिग्ध असद को शनिवार रात पुलिस की कार्रवाई में मार गिराया गया। असद, जो 28 मई को हुई हत्या के बाद से फरार था और जिसकी गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम था, खोड़ा और इंदिरापुरम पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा जवाबी फायरिंग में घायल हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुठभेड़ें एक विशेष धार्मिक पूर्वाग्रह के साथ की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीड़ित मुस्लिम होता, तो कार्रवाई में इतनी तेजी नहीं दिखाई जाती। आज़मी ने कहा कि यह पूरी तरह से गलत है और एक विशिष्ट कार्यप्रणाली स्थापित हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अपराध गंभीर है, तो सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन संविधान एक प्रक्रिया निर्धारित करता है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई
गाजियाबाद जिला प्रशासन ने खोड़ा हत्याकांड के मुख्य संदिग्ध के कथित अवैध मकान को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई आरोपी की मुठभेड़ में मौत के एक दिन बाद की गई। अधिकारियों ने मकान के बाहर 15 दिन का नोटिस चिपकाया है, जिसमें कहा गया है कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर बना है। इस कार्रवाई के दौरान तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनमें आरोपी का पिता और दो साथी शामिल हैं।
