गहलोत का भाजपा पर आरोप: भूमि आवंटन रद्द करने का बदला लेने का आरोप

कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा आवंटित 300 से अधिक भूखंडों के आवंटन को रद्द कर दिया है। गहलोत का कहना है कि यह कार्रवाई प्रतिशोध की भावना से की गई है और इससे समाजों में भारी आक्रोश है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मुद्दे पर श्वेत पत्र जारी किया जाए और रद्द किए गए आवंटनों को पुनः बहाल किया जाए।
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राजस्थान में भूमि आवंटन का विवाद

(फाइल फोटो के साथ) जयपुर, 27 जुलाई - कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने सोमवार को यह आरोप लगाया कि राजस्थान की भाजपा सरकार ने पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा आवंटित 300 से अधिक भूखंडों के आवंटन को रद्द कर दिया है। गहलोत ने कहा कि यह कार्रवाई प्रतिशोध की भावना से की गई है।


उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘हमारी कांग्रेस सरकार के दौरान विभिन्न विभागों में समाजों, संस्थाओं और जनकल्याणकारी उद्देश्यों के लिए 300 से अधिक भूमि आवंटन भाजपा सरकार ने रद्द कर दिए हैं।’’


गहलोत ने बताया कि इनमें से अधिकांश संस्थाओं ने अमानत राशि जमा कराई थी, फिर भी उनके आवंटन निरस्त कर दिए गए। उन्होंने कहा कि ये आवंटन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि गांवों से पढ़ने आने वाले बच्चों के छात्रावास, सामाजिक संस्थाओं और जनसुविधाओं के लिए थे।


गहलोत ने कहा, ‘‘इनका रद्द होना समाजों का अपमान है और युवाओं के भविष्य पर गंभीर आघात है। इससे समाजों में भारी आक्रोश है।’’


उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार के पास अपने नए प्रदेश मुख्यालय और जिला कार्यालयों के लिए भूमि की कोई कमी नहीं है, जबकि वहां आवंटन की फाइलें लगातार चल रही हैं।


पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया, ‘‘क्या राजस्थान की भूमि केवल भाजपा के कार्यालयों के लिए है, जबकि पिछड़े समाजों और हमारे बच्चों के लिए नहीं? क्या भाजपा इन जेन-जी बच्चों को गंभीरता से नहीं लेती है?’’


गहलोत ने सरकार से इस मुद्दे पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।


उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि किन-किन आवंटनों को और किस आधार पर रद्द किया गया। बदले की भावना से किए गए सभी निर्णय तुरंत वापस लिए जाएं और सभी आवंटन पुनः बहाल किए जाएं।’’