गर्मी में नींद की समस्या और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का दिल पर प्रभाव

गर्मी के मौसम में नींद की समस्याएँ आम हैं, और हालिया शोध से पता चला है कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का दिल पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति हार्ट अटैक के जोखिम को 71 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि मोटापे से ग्रस्त लोग इस समस्या से अधिक प्रभावित होते हैं। जानें स्लीप एपनिया के कारण और इससे बचने के उपाय।
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गर्मी में नींद की समस्या और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का दिल पर प्रभाव

गर्मी में नींद की कठिनाइयाँ

गर्मी में नींद की समस्या और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का दिल पर प्रभाव

गर्मी के मौसम में रात में नींद का आना अक्सर मुश्किल हो जाता है। कई अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि बढ़ते तापमान का नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में पाया है कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का दिल पर गंभीर असर होता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा 71 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।


रिसर्च के निष्कर्ष

यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का दिल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज हेल्थ पार्टनर्स की शोधकर्ता हीथर फिट्ज़के ने बताया कि युवा लोगों में यह समस्या विशेष रूप से मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में देखी गई है। इस स्थिति में नींद के दौरान बार-बार जागने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जो दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ाती है।


मोटापे और स्लीप एपनिया का संबंध

इस अध्ययन में 29 लाख लोगों के इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। इसमें यह पाया गया कि ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से ग्रस्त 57 प्रतिशत लोग मोटापे का शिकार हैं। इस समस्या से निपटने के लिए मोटापे को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।


स्लीप एपनिया क्या है?

स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें नींद के दौरान व्यक्ति की सांसें रुक जाती हैं। इसके दो मुख्य कारण होते हैं। पहला, एयरवे ब्लॉकेज, जिसमें गले की मांसपेशियाँ ढीली हो जाती हैं और वायुमार्ग बंद हो जाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।


दिमाग के संकेतों में गड़बड़ी

दूसरा कारण तब होता है जब मस्तिष्क सांस से संबंधित मांसपेशियों को संकेत नहीं भेजता, जिससे सांस रुक जाती है। इस स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन की कमी एक सर्वाइवल रिप्लेक्स को सक्रिय करती है, जिससे व्यक्ति हल्का जाग जाता है और फिर सांस लेता है। इससे नींद बार-बार टूटती है और गहरी नींद नहीं आती, जो समय के साथ दिल पर दबाव डाल सकती है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।