गणतंत्र दिवस पर भारत की नई सैन्य रणनीति का प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस पर सैन्य परेड का महत्व
इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर केवल पारंपरिक सैन्य परेड नहीं होगी, बल्कि भारत की रणनीतिक चेतना, राष्ट्रीय इच्छाशक्ति और मनोवैज्ञानिक प्रभुत्व का एक नया स्वरूप भी देखने को मिलेगा। कर्तव्य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर को केंद्र में रखकर भारतीय सेनाएं दुश्मनों को एक ऐसा संदेश देने जा रही हैं, जो शब्दों से नहीं, बल्कि शक्ति से व्यक्त किया जाएगा। वे लड़ाकू विमान, जिन्होंने सीमापार आतंकी ढांचों को नष्ट किया है, खुले आसमान में गरजते हुए यह स्पष्ट करेंगे कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को न तो छुपाता है और न ही देर से प्रदर्शित करता है। भारत सही समय, सही लक्ष्य और सही तीव्रता से प्रहार करता है।
भैरव बटालियन का महत्व
इस परेड में भैरव बटालियन का पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन केवल एक नई सैन्य इकाई का परिचय नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती युद्ध दृष्टि का संकेत है। यह बटालियन उस नए भारत का प्रतीक है, जो तेज गति, सटीक प्रहार और दुर्गम क्षेत्रों में निर्णायक प्रभुत्व स्थापित करने में विश्वास रखता है। इसका संदेश स्पष्ट है कि भविष्य के संघर्ष लंबे नहीं होंगे, लेकिन उनके परिणाम ऐसे होंगे कि विरोधी की सोच ही टूट जाएगी।
सीडीएस का बयान
भारत के सीडीएस अनिल चौहान का बयान इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की सैन्य और संचालनात्मक कमियों को उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान द्वारा हाल में किया गया सैन्य पुनर्गठन उसकी मजबूती का प्रमाण नहीं, बल्कि उसकी विफलताओं की स्वीकार्यता है। सीडीएस ने यह भी बताया कि कमान और नियंत्रण में बदलाव इस बात का संकेत हैं कि पाकिस्तान भारतीय दबाव को सहन नहीं कर पाया है।
भविष्य के युद्ध की प्रकृति
सीडीएस ने यह भी बताया कि भविष्य के युद्ध अब केवल भूमि, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रहेंगे। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध और तकनीकी बढ़त अब निर्णायक हथियार बन चुके हैं। भारत इस वास्तविकता को स्वीकार कर चुका है और अपनी सैन्य संरचना को उसी के अनुरूप ढाल रहा है। एकीकृत थियेटर कमान की अवधारणा इसी सोच का उदाहरण है, जहां थल, वायु और नौसेना एक साझा लक्ष्य के तहत कार्य करेंगी।
अजित डोभाल का दृष्टिकोण
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने युद्ध की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट शब्दों में परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि युद्ध का उद्देश्य दुश्मन के शव गिनना नहीं, बल्कि उसके मनोबल को तोड़ना होता है। उनका कहना है कि युद्ध इसलिए लड़े जाते हैं ताकि किसी राष्ट्र की इच्छाशक्ति को इस हद तक कुचल दिया जाए कि वह हमारी शर्तों पर झुकने को मजबूर हो जाए।
भारत की नई युद्ध नीति
सीडीएस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के ये वक्तव्य मिलकर भारत की नई युद्ध नीति को स्पष्ट करते हैं। यह नीति केवल प्रतिक्रिया देने की नहीं, बल्कि विरोधी की इच्छाशक्ति को निष्प्रभावी करने की है। भैरव बटालियन जैसे विशेष बल, एकीकृत कमान की संरचना और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया है कि वह अब प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि परिणाम तय करता है।
गणतंत्र दिवस पर ऑपरेशन सिंदूर का प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस पर ऑपरेशन सिंदूर का प्रदर्शन केवल अतीत की सफलता का उत्सव नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यह चेतावनी है कि भारत के खिलाफ किसी भी दुस्साहस की कीमत दुश्मनों को केवल सीमा पर नहीं, बल्कि मनोबल के स्तर पर भी चुकानी पड़ेगी।
