गडकरी ने मानहानिकारक डीपफेक पोस्ट के खिलाफ दीवानी वाद दायर करने की अनुमति प्राप्त की
बंबई उच्च न्यायालय का निर्णय
मुंबई, 27 जुलाई: बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को उनके खिलाफ अपलोड की गई 'मानहानिकारक' डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा निर्मित पोस्ट के संबंध में मेटा प्लेटफॉर्म, एक्स कॉर्प, गूगल एलएलसी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दीवानी वाद दायर करने की अनुमति दी है। गडकरी, जो केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं, ने 'लेटर्स पेटेंट' के खंड-12 के तहत अनुमति याचिका प्रस्तुत की थी। यह एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है, जिसके अनुसार यदि किसी वाद का कारण उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार के बाहर उत्पन्न होता है, तो मुकदमा दायर करने से पहले अदालत से अनुमति लेना आवश्यक होता है।
यह अनुमति आवश्यक है ताकि अदालत अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के बावजूद मुकदमे की सुनवाई कर सके और उस पर निर्णय दे सके। न्यायमूर्ति अभय आहूजा की एकल पीठ ने सोमवार को गडकरी की अनुमति याचिका पर सुनवाई की। गडकरी के वकील संदीप लड्डा ने तर्क दिया कि ऑनलाइन प्लेटफार्मों ने कथित मानहानिकारक और डीपफेक सामग्री को महाराष्ट्र के उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया है।
उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह सामग्री राज्य में भी उपलब्ध है, इसलिए मुकदमे की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महाराष्ट्र में भी उत्पन्न होता है। न्यायमूर्ति आहूजा ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए गडकरी को ऑनलाइन प्लेटफार्मों के खिलाफ दीवानी वाद दायर करने की अनुमति दी। गडकरी ने अपने प्रस्तावित वाद में यह दावा किया है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के मुद्दे पर इंटरनेट पर कई फर्जी, एआई-जनित और मानहानिकारक सामग्री मौजूद हैं।
प्रस्तावित वाद के अनुसार, अज्ञात व्यक्तियों ने ऐसी पोस्ट और डीपफेक सामग्री अपलोड और प्रसारित की हैं, जिनमें उन्हें इस कार्यक्रम (इथेनॉल मिश्रित ईंधन) के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है और यह झूठा दावा किया गया है कि उन्हें और उनके परिवार को इससे आर्थिक लाभ हुआ है। प्रस्तावित वाद में कहा गया है कि पोस्ट में लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे, दुर्भावनापूर्ण और गंभीर रूप से मानहानिकारक हैं, और इनका उद्देश्य गडकरी के खिलाफ जनता में भ्रामक धारणा उत्पन्न करना है। गडकरी इस वाद के माध्यम से ऐसी फर्जी और झूठी सामग्री के प्रसार पर स्थायी रोक लगाने का आदेश चाहते हैं।
