गंगा इफ्तार विवाद: हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और आरोपियों को जमानत
गंगा इफ्तार विवाद का मामला
वाराणसी में गंगा नदी पर आयोजित इफ्तार पार्टी और चिकन बिरयानी के अवशेष फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई है। अदालत ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इस मामले में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह टिप्पणी की।
धार्मिक आस्था का सम्मान
जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने इस विवाद में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पवित्र स्थलों पर किसी भी समुदाय द्वारा ऐसे कृत्य नहीं किए जाने चाहिए जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अदालत ने यह भी माना कि आरोपियों ने अपनी गलती स्वीकार की है और समाज को हुई ठेस के लिए गहरा पछतावा व्यक्त किया है।
आरोपियों की जमानत मंजूर
हाई कोर्ट ने 14 में से 8 मुस्लिम युवकों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। अदालत ने पुलिस द्वारा लगाए गए जबरन वसूली के आरोपों पर सवाल उठाए और कहा कि ये आरोप संदिग्ध हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें और अधिक समय तक जेल में रखना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया पर जांच जारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आरोपियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर तनाव फैलाने की साजिश का आरोप लगाया। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस इस मामले की जांच जारी रख सकती है, बिना आरोपियों को जेल में रखे।
क्या हुआ था?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मार्च में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ युवक गंगा नदी में इफ्तार कर रहे थे और चिकन बिरयानी के अवशेष नदी में फेंक रहे थे। इस वीडियो के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और 14 लोगों को गिरफ्तार किया।
