खैरागढ़ में मतदाता सूची में लापरवाही से उठे गंभीर सवाल
मतदाता सूची में गंभीर त्रुटियां
खैरागढ़ जिले में चल रहे मतदाता सूची के विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान ने लोकतंत्र की नींव को हिला दिया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और त्रुटिहीन बनाना था, लेकिन अब यह लापरवाही और संभावित फर्जीवाड़े के आरोपों में घिर गई है।
राजा देवव्रत सिंह का विवादित रिकॉर्ड
यह मामला दिवंगत राजा देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति से संबंधित है, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गलती की गई है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तलाक के बावजूद पत्नी के रूप में दर्ज
रानी विभा सिंह ने आरोप लगाया है कि SIR टीम और संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर की लापरवाही के कारण आधिकारिक दस्तावेजों में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है। जानकारी के अनुसार, पद्मा देवी सिंह, जो दिवंगत राजा की तलाकशुदा पत्नी हैं, उन्हें अब भी उनकी पत्नी के रूप में दर्ज किया गया है।
कानूनी स्थिति पर सवाल
इस मामले ने एक गंभीर प्रश्न उठाया है कि क्या सरकारी दस्तावेजों में एक हिंदू पुरुष के नाम पर दो पत्नियों का दर्ज होना संभव है। यदि हां, तो कानून और संवैधानिक मर्यादाओं का क्या होगा।
मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गंभीर त्रुटियां मतदाता सूची की पवित्रता को नुकसान पहुंचाती हैं। मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ होती है, लेकिन जब इसमें इस स्तर की लापरवाहियां होती हैं, तो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
आम जनता के दस्तावेजों की सुरक्षा
रानी विभा सिंह ने कहा कि जब एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि के दस्तावेजों में इतनी गंभीर गलती हो सकती है, तो आम नागरिकों के रिकॉर्ड की स्थिति क्या होगी, इसकी कल्पना करना भी डरावना है।
स्वतंत्र जांच की मांग
रानी विभा सिंह ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषी कर्मियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और सभी त्रुटिपूर्ण रिकॉर्ड को तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस गंभीर मामले के सामने आने के बावजूद प्रशासन और चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। खैरागढ़ जिले में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं, और लोग जानना चाहते हैं कि क्या इसे मानवीय भूल कहकर दबा दिया जाएगा।
