खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की वापसी की चिंता बढ़ी
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष के चलते खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़ रही है। लगभग 12,000 भारतीयों ने भारत सरकार से मदद मांगी है। विशेष उड़ानों के जरिए कुछ नागरिकों को वापस लाया गया है, लेकिन हजारों लोग अभी भी फंसे हुए हैं। स्थिति गंभीर है, और भारतीय दूतावास ने सुरक्षा उपायों की चेतावनी दी है। भारत सरकार ने सहायता के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, लेकिन व्यापक निकासी योजना की कमी से नागरिकों में चिंता बढ़ रही है।
| Mar 6, 2026, 13:41 IST
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट की स्थिति
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के सातवें दिन हालात और भी गंभीर हो गए हैं। लगातार हो रहे हमलों और हवाई मार्गों के बंद होने के कारण खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की चिंता बढ़ती जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 12,000 भारतीयों ने अपने देश लौटने के लिए भारत सरकार से सहायता मांगी है और वे क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावासों से संपर्क में हैं।
संयुक्त अरब अमीरात में संकट की गहराई
सबसे अधिक संकट संयुक्त अरब अमीरात में देखा जा रहा है। ईरान के हमलों के कारण वहां का हवाई क्षेत्र लगभग बंद हो चुका है, जिससे सामान्य उड़ान सेवाएं ठप हो गई हैं। इस स्थिति के कारण हजारों भारतीय यात्री वहां फंसे हुए हैं और उनके लिए घर लौटने का रास्ता लगभग बंद हो गया है।
फंसे हुए भारतीयों की संख्या
सूत्रों के अनुसार, फंसे हुए भारतीयों में बड़ी संख्या उन लोगों की है जो थोड़े समय के लिए यात्रा या काम के सिलसिले में संयुक्त अरब अमीरात गए थे। इनमें ऐसे यात्री भी शामिल हैं जो किसी अन्य देश जाने के लिए वहां रुके हुए थे। इसके अलावा, कई छात्र भी इस संकट में फंसे हैं क्योंकि ईरानी हमलों के बाद कई शिक्षण संस्थान बंद हो गए हैं या पढ़ाई ऑनलाइन हो रही है।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ही लगभग 22,000 भारतीय नागरिकों ने भारत सरकार से संपर्क किया था। यह संख्या इस बात का प्रमाण है कि खाड़ी क्षेत्र में बसे भारतीयों के सामने किस प्रकार की असुरक्षा का माहौल बन गया है। हालांकि, पिछले तीन दिनों में कुछ अस्थायी उड़ानों के जरिए लगभग 10,000 भारतीयों को वापस लाया गया है, लेकिन अभी भी हजारों लोग विभिन्न देशों में फंसे हुए हैं।
वापसी के लिए कठिनाइयाँ
रिपोर्टों के अनुसार, दोहा से भी लगभग 850 भारतीय नागरिकों ने घर लौटने की मांग की थी। वहां का हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण उन्हें कठिन रास्ता अपनाना पड़ा। इन लोगों ने जमीन के रास्ते सऊदी अरब की सीमा पार की और फिर रियाद हवाई अड्डे से भारत के लिए उड़ान भरी। यह प्रक्रिया बेहद कठिन और समय लेने वाली साबित हुई।
सुरक्षा उपायों की आवश्यकता
दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे व्यस्त हवाई अड्डों पर सामान्य उड़ान सेवाएं बंद होने से स्थिति और जटिल हो गई है। कुछ उड़ानें संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह से संचालित की गई हैं, लेकिन उनकी संख्या सीमित है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता संयुक्त अरब अमीरात है, जहां भारतीयों की बड़ी संख्या निवास करती है।
भारतीय दूतावास की चेतावनी
मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने चेतावनी दी है कि ओमान में प्रवेश के लिए यात्रियों के पास वैध वीजा होना अनिवार्य है। बिना वीजा के सीमा पार करने की कोशिश करने वालों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
भारत सरकार की प्राथमिकता
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में हो रहे किसी भी नकारात्मक घटनाक्रम को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। मोदी सरकार ने सहायता के लिए एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है ताकि फंसे हुए भारतीय नागरिकों को तुरंत मदद मिल सके।
भविष्य की चिंता
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती जंग और हमलों के बीच हजारों भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए कोई व्यापक निकासी योजना अभी तक घोषित नहीं की गई है। इस स्थिति में फंसे हुए भारतीयों की चिंता और गुस्सा बढ़ता जा रहा है, और वे अपने देश से जल्द और ठोस कदम की उम्मीद कर रहे हैं।
