खाड़ी देशों में नागरिकता रद्द करने का बढ़ता चलन
खाड़ी देशों में नागरिकता छिनने की नई प्रवृत्ति
ईरान के साथ संघर्ष के बाद, खाड़ी देशों में अपने नागरिकों की नागरिकता रद्द करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। हाल ही में, कुवैत ने 1266 नागरिकों की नागरिकता समाप्त करने की घोषणा की। इसके एक दिन बाद, बहरीन ने 69 नागरिकों की नागरिकता छीन ली। बहरीन सरकार का कहना है कि यह निर्णय राजा के आदेश पर लिया गया है, और इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रवृत्ति खतरनाक हो सकती है, जिससे भविष्य में हजारों लोगों की नागरिकता संकट में पड़ सकती है।
कुवैत ने 1266 नागरिकों की नागरिकता रद्द की
एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत ने 1266 नागरिकों की नागरिकता रद्द कर दी है। इनमें पूर्व सांसद अल-फिक्र, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी अहमद अल-तराबुलसी और प्रसिद्ध लेखक अब्दुलअजीज अल-सारी जैसे नाम शामिल हैं।
कुवैत का कहना है कि यह नागरिकता उन लोगों की रद्द की गई है, जो वास्तव में कुवैत के निवासी नहीं हैं। इनमें से अधिकांश वे लोग हैं, जिन्होंने कुवैती नागरिकों से विवाह कर स्थायी नागरिकता प्राप्त की थी। कुवैत ने 2024 से इस अभियान की शुरुआत की है।
कुवैत का यह कदम ईरान और उसके समर्थकों के खिलाफ एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि युद्ध के दौरान ईरान ने कुवैत पर भी कई हमले किए थे।
बहरीन ने 69 नागरिकों की नागरिकता रद्द की
रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन ने 69 नागरिकों की नागरिकता रद्द की है, जिन्होंने ईरान के साथ युद्ध के दौरान जश्न मनाया था। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह निर्णय राजा के निर्देश पर लिया गया है। बहरीन सरकार ने पहले ही ऐसे नागरिकों को चेतावनी दी थी।
बहरीन एक शिया बहुल देश है, लेकिन यहां सुन्नी समुदाय का प्रभाव अधिक है। जब ईरान युद्ध के दौरान बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले हो रहे थे, तब कई नागरिकों ने जश्न मनाया।
ब्रिटेन स्थित बहरीन इंस्टीट्यूट फॉर राइट्स एंड डेमोक्रेसी के निदेशक सैयद अहमद अलवदाई ने इसे एक खतरनाक युग की शुरुआत बताया है। उनके अनुसार, इससे मध्य पूर्व में दमन बढ़ेगा और सरकार अपने अनुसार निर्णय ले सकेगी।
