क्या भारत में प्लास्टिक के नोटों की छपाई होगी? जानें सच्चाई

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्लास्टिक नोटों की छपाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, आरबीआई ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रिपोर्ट में नोटों की सुरक्षा और स्वच्छता को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। वर्तमान में, 500 रुपये के नोट का देश में प्रमुख स्थान है, जबकि जाली नोटों के मामलों में वृद्धि हुई है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और आरबीआई का खर्च कैसे प्रभावित हुआ है।
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आरबीआई और प्लास्टिक नोटों की चर्चा

हाल के दिनों में बाजार और सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जल्द ही देश में प्लास्टिक के नोट जारी करने की योजना बना रहा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, आरबीआई की मुंबई और पटना में हुई बैठकों में इस विषय पर चर्चा की गई। लेकिन जब बात देश की मुद्रा और अर्थव्यवस्था की होती है, तो केवल अनिश्चित जानकारी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।


आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में क्या कहा गया?

आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में नोटों के सुरक्षा मानकों को आधुनिक बनाने की बात की है, लेकिन प्लास्टिक या पॉलिमर नोटों के छापने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (बीआरबीएनएमपीएल) बैंक नोटों के डिजाइन और मुद्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले वर्ष, बीआरबीएनएमपीएल के मैसूरु प्रिंटिंग प्रेस में 'वार्निश किए गए नोटों' का सफल परीक्षण किया गया।


नए नोटों की छपाई से जुड़ी सच्चाई

आइए सवाल-जवाब के माध्यम से समझते हैं कि नए नोटों की छपाई की वास्तविकता क्या है।


सवाल: क्या आरबीआई सच में प्लास्टिक के नोट जारी करने वाला है? जवाब: नहीं, आरबीआई ने अभी तक प्लास्टिक के नोटों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में करेंसी के आधुनिकीकरण का उल्लेख किया है।


सवाल: आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में क्या कहा है? जवाब: आरबीआई के लिए बैंक नोटों की सुरक्षा और स्वच्छता प्राथमिकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कागज बनाने की प्रक्रिया में सुधार किया गया है।


देश में चलन में कौन सी करेंसी है?

वर्तमान में, 500 रुपये के नोट का देश के नकदी तंत्र में प्रमुख स्थान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक, 500 रुपये के नोटों की संख्या 11.2 प्रतिशत बढ़कर 7,05,482 लाख पीस हो गई है।


हालांकि, 500 रुपये के जाली नोटों के पकड़े जाने के मामलों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।


सवाल: क्या नए नोटों की छपाई पर आरबीआई का खर्च बढ़ा है? जवाब: नोटों की छपाई का खर्च घटा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बैंक नोटों की मांग पिछले वर्ष की तुलना में कम रही है।