क्या बिना शारीरिक संबंध के भी रिश्ते को बनाए रखा जा सकता है?
रिश्तों में शारीरिक संबंध का महत्व
यदि आप विवाहित हैं या किसी दीर्घकालिक संबंध में हैं, तो यह सवाल अक्सर आपके मन में आता होगा कि आपको कितनी बार शारीरिक संबंध बनाने चाहिए। यह एक पुराना प्रश्न है, जो बार-बार उठता है। लेकिन क्या आप बिना सेक्स के भी एक सफल और खुशहाल रिश्ता बना सकते हैं? YouGov के आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन में केवल 27 प्रतिशत लोग ही सप्ताह में एक बार शारीरिक संबंध बनाते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक सर्वे में 29 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने कहा कि उनका रिश्ता 'सेक्सलेस' है।
20 वर्ष की आयु के अंत में लोग किसी अन्य आयु वर्ग की तुलना में अधिक नियमित रूप से यौन संबंध बनाते हैं, जिसमें 25 से 29 वर्ष के 43 प्रतिशत लोग एक सामान्य सप्ताह में यौन संबंध बनाते हैं। यह सवाल उठता है कि क्या शादी को बनाए रखने के लिए सेक्स ही सब कुछ है?
विशेषज्ञों की राय
क्या सेक्स जरूरी है?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्स हमेशा रिश्ते की सफलता का संकेत नहीं होता। इसका अभाव किसी रिश्ते के लिए अंत नहीं होता। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि दोनों साथी एक ही पृष्ठ पर हों। संबंध और यौन विशेषज्ञ कर्टनी बॉयर का कहना है कि सेक्स की आवश्यकता रिश्ते के उद्देश्य पर निर्भर करती है।
आज के रिश्तों में शारीरिक संबंध की आवश्यकता
क्या शारीरिक संबंध जरूरी हैं?
दुर्भाग्य से, आधुनिक विवाहों में अक्सर एक-दूसरे की सभी जरूरतों को पूरा करने का बहुत दबाव होता है, जो सही नहीं है। कर्टनी बॉयर बताती हैं कि अधिकांश रोमांटिक रिश्तों में सेक्स पर बहुत जोर दिया जाता है, खासकर शुरुआत में। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि विवाह को सफल बनाने के लिए सेक्स की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक या दोनों साथी सेक्स की इच्छा नहीं रखते हैं, तो रिश्ता फिर भी चल सकता है।
शारीरिक संबंधों में सुधार के लिए संवाद का महत्व
संवाद करें:
यदि आप अपने विवाहित जीवन में शारीरिक संबंधों की कमी महसूस कर रहे हैं, तो अपने साथी से इस बारे में खुलकर बात करें। उन्हें बताएं कि आपको शारीरिक संबंधों की आवश्यकता है। बातचीत करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
शांत और शालीन रहें: जब आप अपने साथी से इस विषय पर बात करें, तो गुस्सा या चिड़चिड़ापन न दिखाएं।
स्पष्ट और संक्षिप्त रहें: अपने विचारों को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से व्यक्त करें।
दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखें: अपने साथी की भावनाओं का भी ध्यान रखें और उन्हें यह महसूस न होने दें कि आप उन्हें दोष दे रहे हैं।
