क्या आधार कार्ड और पासपोर्ट नागरिकता के प्रमाण हैं?
क्या आधार कार्ड और पासपोर्ट वास्तव में आपकी भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करते हैं? वरिष्ठ वकील विराग गुप्ता ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि एक लाख में से एक व्यक्ति अपराध करता है, तो बाकी निर्दोष लोगों को कानूनी संकट में नहीं डालना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने भारत के पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय साख पर चिंता जताई है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
| Jul 18, 2026, 17:45 IST
नागरिकता के दस्तावेजों पर गंभीर सवाल
आजकल जब भी पहचान की आवश्यकता होती है, हम तुरंत आधार कार्ड या पासपोर्ट निकालते हैं। लेकिन क्या ये दस्तावेज वास्तव में हमारी भारतीय नागरिकता को प्रमाणित करते हैं? इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर वरिष्ठ वकील और कानूनी विशेषज्ञ विराग गुप्ता ने एक ऐसा तर्क प्रस्तुत किया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चाओं में नया मोड़ ला दिया है। अपने विशेष कार्यक्रम 'नो फिल्टर विथ विराग गुप्ता' में, उन्होंने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल के एक पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कई सवाल उठाए हैं।
कानूनी संकट का समाधान
1 लाख में 1 अपराधी, तो सबको कानूनी संकट क्यों?
चर्चा के दौरान, विराग गुप्ता ने संजीव सान्याल के विचारों को दोहराते हुए कहा कि यदि एक लाख लोगों में से एक व्यक्ति अपराध करता है, तो हमें बाकी 99,999 निर्दोष लोगों को कानूनी संकट में नहीं डालना चाहिए। यही सिद्धांत नागरिकता के दस्तावेजों और पासपोर्ट पर भी लागू होना चाहिए। यदि कुछ सौ या हजार लोगों ने फर्जी पासपोर्ट या वोटर आईडी बनाई है, तो सरकार को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि करोड़ों वैध पासपोर्ट धारकों को बार-बार अपनी पहचान साबित करने के लिए मजबूर करना चाहिए।
भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साख का सवाल
विराग गुप्ता ने चिंता व्यक्त की कि भारत का पासपोर्ट विदेशों में हमारी नागरिकता का मजबूत प्रमाण माना जाता है, लेकिन देश के भीतर कुछ कानूनी तर्कों के कारण इसे 'सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज' कहा जाता है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट रैंकिंग में भारत पहले से ही पीछे है। यदि हम अपने सरकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर बार-बार सवाल उठाते हैं, तो इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों की छवि प्रभावित होती है और उन्हें इमीग्रेशन जैसी जगहों पर संदेह की नजर से देखा जा सकता है।
