कोहिनूर हीरे की वापसी पर अमेरिका से उठी नई आवाज

कोहिनूर हीरे की वापसी को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने ब्रिटिश शाही परिवार से इस अनमोल हीरे को भारत को लौटाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह हीरा भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर क्या प्रतिक्रिया होगी, यह देखने योग्य होगा। क्या भारत को उसकी ऐतिहासिक धरोहर वापस मिलेगी? जानें इस लेख में।
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कोहिनूर हीरे की वापसी पर अमेरिका से उठी नई आवाज gyanhigyan

कोहिनूर हीरे की ऐतिहासिक मांग


भारत की सांस्कृतिक धरोहर माने जाने वाले कोहिनूर हीरे को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। इस बार अमेरिका से न्यूयॉर्क के मेयर एरिक एडम्स ने ब्रिटिश शाही परिवार से इस अनमोल हीरे को भारत को लौटाने की अपील की है।


एडम्स ने कहा कि कोहिनूर सिर्फ एक कीमती पत्थर नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। उनका मानना है कि औपनिवेशिक काल में जो वस्तुएं उपनिवेशों से ली गई थीं, उन्हें उनके मूल स्थानों पर लौटाना चाहिए। इस बयान के बाद कोहिनूर की वापसी पर वैश्विक चर्चा फिर से तेज हो गई है।


यह ध्यान देने योग्य है कि कोहिनूर हीरा वर्तमान में लंदन के टॉवर में ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है। यह हीरा वर्षों से भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्वामित्व के विवाद का विषय रहा है, जबकि भारत इसे अपनी ऐतिहासिक धरोहर मानता है।


इतिहासकारों के अनुसार, कोहिनूर का संबंध भारत के प्राचीन और मध्यकालीन राजवंशों से है। इसे कई शासकों ने अपने पास रखा, लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान इसे भारत से बाहर ले जाया गया। इसी कारण भारत इसकी वापसी की मांग करता रहा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोहिनूर को वापस किया जाता है, तो यह केवल एक सांस्कृतिक वस्तु की वापसी नहीं होगी, बल्कि औपनिवेशिक इतिहास से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।


हालांकि, ब्रिटेन की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई ठोस संकेत नहीं मिला है। पहले भी कई बार इस तरह की मांगें उठ चुकी हैं, लेकिन हर बार यह मुद्दा कूटनीतिक स्तर पर ही सीमित रह गया।


इस नई अपील के बाद एक बार फिर यह सवाल उठता है कि क्या भारत को उसकी ऐतिहासिक धरोहर वापस मिलेगी, या यह विवाद यूं ही चलता रहेगा। फिलहाल, दुनिया की नजर इस पर है कि ब्रिटेन इस अपील पर क्या प्रतिक्रिया देता है।