कोलकाता हवाई अड्डे पर सुरक्षा उपायों से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
कोलकाता हवाई अड्डे पर गौरीपुर जामा मस्जिद में सामूहिक नमाज के लिए प्रवेश पास पर रोक और नए सुरक्षा कानूनों ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। मस्जिद का स्थानांतरण और नए कानूनों का कार्यान्वयन संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए किया गया है। जानें इस विवाद और सुरक्षा उपायों के पीछे की कहानी।
| Jul 13, 2026, 18:00 IST
कोलकाता हवाई अड्डे की मस्जिद पर सुरक्षा प्रतिबंध
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थित गौरीपुर जामा मस्जिद में सामूहिक नमाज के लिए प्रवेश पास पर रोक और नए सुरक्षा नियमों ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा सभी अन्य प्राथमिकताओं से अधिक महत्वपूर्ण है।
मस्जिद का विवाद और सुरक्षा चिंताएँ
यह मस्जिद, जो कि एक सौ छत्तीस वर्ष पुरानी है, लंबे समय से विवाद का केंद्र रही है। हवाई अड्डे के दो रनवे हैं, जिनमें से एक छोटा है और मस्जिद उसके निकट स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुख्य रनवे बंद हो जाए, तो दूसरे रनवे का उपयोग अनिवार्य हो जाता है। इस स्थिति में मस्जिद की उपस्थिति रनवे विस्तार की योजनाओं में बाधा डालती है और विमान संचालन के लिए जोखिम पैदा करती है। इसलिए, हवाई अड्डा प्रशासन ने इसके स्थानांतरण पर विचार किया है।
सुरक्षा उपायों का उद्देश्य
इसी संदर्भ में, हवाई अड्डा प्रशासन ने सामूहिक नमाज के लिए प्रवेश पास जारी करना बंद कर दिया है और परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। यह कदम किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही को रोकने के लिए उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि किसी को अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका गया है। उन्होंने बकरीद और मुहर्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुए हैं।
सुरक्षा चिंताओं पर विधायक की टिप्पणी
दमदम उत्तर से विधायक सौरव सिकदर ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए बायोमेट्रिक पास अनिवार्य है, जबकि नमाज के लिए आने वाले लोगों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं थी। यह मस्जिद एक उच्च सुरक्षा स्तर के क्षेत्र में है, जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे विशिष्ट व्यक्तियों की आवाजाही होती है।
केंद्रीय मंत्री का समर्थन
केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका मानना है कि अब सरकार विकास और सुरक्षा दोनों को प्राथमिकता देते हुए मस्जिद के स्थानांतरण का रास्ता साफ करेगी। राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने भी कहा कि रनवे क्षेत्र में इस ढांचे का बने रहना उचित नहीं था।
मस्जिद समिति की आपत्ति
मस्जिद समिति के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मस्जिद एक सौ छत्तीस वर्ष पुरानी है और अधिकारियों के साथ बातचीत चल रही है, इसलिए नमाज के लिए प्रवेश रोकने की आवश्यकता नहीं थी। हालांकि, सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय प्रशासनिक एजेंसियों का होता है।
नए कानूनों का कार्यान्वयन
पश्चिम बंगाल सरकार ने संगठित अपराध और हिंसक प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के लिए दो नए कानून भी लागू किए हैं। इन कानूनों के तहत संदिग्ध असामाजिक तत्वों को निवारक हिरासत में रखने और दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार प्रशासन को दिया गया है।
मुख्यमंत्री की नई पहल
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोलह अगस्त को खेला होबे दिवस के स्थान पर आयुष्मान दिवस मनाने की घोषणा की है। यह दिन राज्य सरकार के सौ दिन पूरे होने का प्रतीक होगा।
सुरक्षा और कानून व्यवस्था का महत्व
कुल मिलाकर, कोलकाता हवाई अड्डे की सुरक्षा, रनवे विस्तार, और संगठित अपराध के खिलाफ कठोर कानूनी व्यवस्था के कदमों का उद्देश्य राज्य में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करना है। राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और यदि किसी व्यवस्था में परिवर्तन से नागरिकों की सुरक्षा और कानून का शासन मजबूत होता है, तो ऐसे निर्णयों को जनहित में देखा जाना चाहिए।
