कोलकाता में पत्रकारों का नीट प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में पत्रकारों ने नीट प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ एक रैली का आयोजन किया। इस प्रदर्शन में मीडिया कर्मियों पर हुए हमलों का विरोध किया गया, जिसमें कई पत्रकार घायल हुए थे। पत्रकारों ने सुरक्षा की मांग करते हुए ज्ञापन भी सौंपा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हमलों को अस्वीकार्य बताया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस घटना ने पत्रकारों के लिए सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर किया है।
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कोलकाता में पत्रकारों का विरोध प्रदर्शन

कोलकाता, 27 जुलाई: पश्चिम बंगाल की राजधानी में सैकड़ों पत्रकारों ने सोमवार को एक रैली का आयोजन किया। यह रैली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ थी, जिसमें 24 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों पर हुए हमलों का विरोध किया गया। इस घटना में कई पत्रकार घायल हुए थे। कोलकाता और आसपास के जिलों के रिपोर्टर, फोटो पत्रकार, वीडियो पत्रकार और डिजिटल कंटेंट निर्माता इस विरोध में शामिल हुए।


यह रैली प्रेस क्लब से शुरू होकर रानी रासमणि एवेन्यू पर समाप्त हुई। पत्रकारों ने अपने पेशेवर कर्तव्यों के दौरान सुरक्षा की मांग करते हुए मानव श्रृंखला बनाई। पुलिस ने नीट प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ 24 जुलाई को हुए मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया है।


गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से पांच को सोमवार को एस्प्लेनेड स्थित डोरिना चौराहे पर ले जाया गया ताकि घटनाक्रम को पुनः समझा जा सके। प्रदर्शन के दौरान घायल पत्रकारों ने लोक भवन जाकर अधिकारियों से मुलाकात की और घटना की जानकारी दी, साथ ही मामले में हस्तक्षेप की मांग की।


इस दौरान राज्यपाल आर. एन. रवि लोक भवन में उपस्थित नहीं थे। बाद में, पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जलपाईगुड़ी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।


मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पत्रकारों पर हमले अस्वीकार्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सरकारों के समय में घायल पत्रकारों की शिकायतें अक्सर केवल जनरल डायरी तक सीमित रह जाती थीं और प्राथमिकी में नहीं बदली जाती थीं। वर्तमान भाजपा सरकार ने हमलों के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की है और 16 लोगों को कानून की गैर-जमानती धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है।


शुभेंदु ने यह भी बताया कि अतीत में कई बार जब पत्रकारों पर हमले हुए, तो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की। ज्ञापन में मीडिया से जुड़े लोगों ने 24 जुलाई की घटना के बाद मुख्यमंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की, लेकिन चिंता जताई कि पत्रकारों पर हमलों से डर और असुरक्षा का माहौल बनता है, विशेषकर महिला पत्रकारों के लिए।


ज्ञापन में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है, जिससे पत्रकार बिना किसी डर या हिंसा के जानकारी जुटा सकते हैं। पत्रकारों पर हमले न केवल उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि जनता के स्वतंत्र और सटीक जानकारी प्राप्त करने के अधिकार को भी कमजोर करते हैं।