कोलकाता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की याचिका खारिज की

कोलकाता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने उन्हें सरकारी अस्पताल के चिकित्सकीय बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने की सलाह दी थी, लेकिन बनर्जी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन आवश्यक है। जानें इस मामले में और क्या हुआ और बनर्जी की कानूनी स्थिति क्या है।
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कोलकाता उच्च न्यायालय का निर्णय

कोलकाता, पांच अगस्त: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा आंख के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति की याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया। अदालत ने पहले उन्हें सलाह दी थी कि वे छह अगस्त को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के चिकित्सकीय बोर्ड के समक्ष उपस्थित हों। हालांकि, बनर्जी ने अदालत को सूचित किया कि वे चिकित्सकीय बोर्ड के समक्ष पेश होने के लिए तैयार नहीं हैं।


इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने उनकी विदेश यात्रा की याचिका को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एसएसकेएम अस्पताल के चिकित्सकों के समक्ष उनकी उपस्थिति अनिवार्य है, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन किया जा सके और यह तय किया जा सके कि क्या विदेश में इलाज कराना आवश्यक है या भारत में ही उपचार संभव है। पीठ ने कहा कि इस समय सबसे महत्वपूर्ण बात याचिकाकर्ता का उपचार है।


उपचार का स्थान महत्वपूर्ण नहीं है। इससे पहले, एक आपराधिक मामले में अंतरिम संरक्षण देते हुए उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि बनर्जी बिना अदालत की अनुमति के भारत नहीं छोड़ सकते। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।


उच्चतम न्यायालय ने तीन अगस्त को उच्च न्यायालय से उनकी विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं और ऐसी कोई आपात चिकित्सकीय स्थिति नहीं है, जिसके लिए विदेश जाकर इलाज कराना आवश्यक हो। उन्होंने यह भी कहा कि बनर्जी के खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकी में जांच जारी है और ऐसे में देश में उनकी उपस्थिति आवश्यक हो सकती है।


बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने तर्क किया कि उपचार के लिए चिकित्सक और चिकित्सा संस्थान का चयन करना हर व्यक्ति का अधिकार है, विशेष रूप से तब जब इलाज की निरंतरता का प्रश्न हो।