कॉकरोच जनता पार्टी का नया कदम: प्रेशर ग्रुप के रूप में कार्य करने की योजना

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक प्रेशर ग्रुप के रूप में कार्य करने का निर्णय लिया है। संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि संगठन जन-विश्वास में कमी, इथेनॉल-मिश्रित ईंधन और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगा। CJP छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की मांग करेगा और घायल प्रदर्शनकारियों को सहायता प्रदान करेगा। जानें इस आंदोलन के विस्तार और इसके पीछे के कारणों के बारे में।
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CJP का उद्देश्य और बैठक

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी फिलहाल एक प्रेशर ग्रुप के रूप में कार्य करेगी। हाल ही में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक बैठक में, संगठन की कोर टीम ने जन-विश्वास में कमी, इथेनॉल-मिश्रित ईंधन और बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। दिपके ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वर्तमान समय में भारत को किसी राजनीतिक पार्टी की नहीं, बल्कि एक प्रेशर ग्रुप की आवश्यकता है।


संगठन की गतिविधियाँ

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि आंदोलन के मेंटर के रूप में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक कार्य करते रहेंगे, और ग्रुप उनसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सलाह लेगा। दास ने यह भी कहा कि संगठन उन छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की मांग करेगा, जिन्होंने हाल ही में NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के खिलाफ CJP के नेतृत्व में प्रदर्शन किया था। इस मामले पर सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत चल रही है।


छात्र आंदोलनों का समर्थन

CJP के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि संगठन देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों को कानूनी और चिकित्सा सहायता प्रदान करने का कार्य कर रहा है। कोर टीम की बैठक में मीडिया और न्यायपालिका पर जनता के विश्वास में कमी, इथेनॉल-मिश्रित ईंधन और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अभियान का नेतृत्व करने के लिए दिपके जून में अमेरिका से भारत लौटे। इस आंदोलन में विभिन्न हिस्सों से युवा प्रदर्शनकारी दिल्ली में इकट्ठा हुए और परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।


विरोध प्रदर्शनों का विस्तार

यह आंदोलन तेजी से Gen Z समूहों के बीच फैल गया और कई शहरों तक पहुँच गया। हालांकि, कुछ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बिहार में पुलिस की कार्रवाई की खबरें आईं, जहाँ कई छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए।