कैसे पहचानें केमिकल से पकाए गए आम और प्राकृतिक आम में अंतर
आमों में केमिकल का खतरा
आजकल बाजार में ऐसी कई चीजें उपलब्ध हैं, जिनमें किसी न किसी प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जाता है। फलों को जल्दी पकाने और आकर्षक बनाने के लिए भी केमिकल का सहारा लिया जाता है, जिसमें आम भी शामिल हैं। यदि आप बाजार से चमकीले पीले आम खरीद रहे हैं, तो यह जरूरी नहीं कि वे स्वाभाविक रूप से पेड़ पर पके हों। कई बार आमों को रासायनिक तरीकों से पकाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। हाल ही में हैदराबाद में अधिकारियों ने लगभग 200 किलो संदिग्ध केमिकल से पकाए गए आमों को जब्त किया है, जो स्थानीय बाजारों में बेचे जा रहे थे। ऐसे में आम खरीदने वालों के लिए यह जानना आवश्यक है कि नैचुरल और केमिकल से पकाए गए आमों में क्या अंतर है।
केमिकल का उपयोग
आमों को पकाने के लिए कई बार कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे आम देखने में ताजे और पीले होते हैं, लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। इन रसायनों के सेवन से सिरदर्द, चक्कर, सांस लेने में कठिनाई, उल्टी और पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
सही आम की पहचान के तरीके
1. रंग पर ध्यान दें: केमिकल से पकाए गए आम का रंग बहुत चमकीला पीला होता है, जबकि प्राकृतिक आम हल्के पीले या हरे रंग के होते हैं। यदि सभी आम एक समान पीले दिख रहे हैं, तो यह संदिग्ध हो सकता है।
2. दबाकर जांचें: केमिकल से पकाए गए आम छूने पर सख्त लगते हैं, लेकिन अंदर से गले हुए होते हैं। यदि आम बार-बार केमिकल में रखा गया है, तो वह अंदर से अधिक गला हुआ हो सकता है। स्वाद में भी केमिकल वाले आम हल्का फीका लग सकता है।
3. काले धब्बों की जांच करें: कई आमों पर काले धब्बे या दबे हुए निशान होते हैं, जो इंजेक्शन से पकाए गए आमों के संकेत होते हैं। आम खरीदते समय चोपी के पास दबा हुआ या काला निशान देखना न भूलें।
