केरल सरकार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रिश्वत मामले की जांच का आदेश दिया
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ जांच का आदेश
तिरुवनंतपुरम। केरल के गृह विभाग ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया है। यह मामला 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक निर्माण कार्यों के बिलों को पास करने के लिए ठेकेदारों से रिश्वत मांगी थी।
नई शिकायत के आधार पर जांच
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के कार्यालय ने बुधवार को बताया कि यह जांच ठेकेदार साजन द्वारा दर्ज कराई गई एक नई शिकायत के आधार पर की जाएगी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने भारत और मलेशिया के संयुक्त उद्यम 'पार्टी-बेल' के तहत एक सड़क परियोजना के मलेशियाई प्रोजेक्ट मैनेजर ली सी बीन से दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस परियोजना से जुड़े इंजीनियर ली ने नवंबर 2005 में मलेशिया में आत्महत्या कर ली थी। उनके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर रिश्वत मांगने का आरोप था।
पिछली जांच पर सवाल
यह मामला पहले से ही वीएसीबी के ध्यान में था, क्योंकि पिछले महीने कांग्रेस नेता मयंकरीझू वेणुगोपाल ने गृह मंत्री को एक शिकायत सौंपी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मलेशियाई इंजीनियर के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम था और बाहरी दबाव के कारण 2006 में हुई वीएसीबी की जांच को प्रभावित किया गया। गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, वेणुगोपाल की शिकायत के बाद वीएसीबी ने इस मामले की जांच फिर से शुरू करने के लिए कानूनी सलाह मांगी थी।
साजन का दावा
साजन ने 23 अक्टूबर को गृह मंत्री को दी गई अपनी शिकायत में कहा कि ज्ञानेश कुमार ही ली की आत्महत्या के असली कारण थे। उन्होंने बताया कि वे उस संयुक्त उद्यम के लिए सामग्री आपूर्तिकर्ताओं में से एक थे और परियोजना के काम की निगरानी करने वाले दो व्यक्तियों में शामिल थे। साजन के अनुसार, ली ने उन्हें बताया था कि ज्ञानेश कुमार ने उन बिलों को मंजूरी देने के लिए दो करोड़ रुपये की मांग की थी।
ली के परिवार का बयान
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि ली के परिवार ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि उनके सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का स्पष्ट उल्लेख था। साजन ने कहा कि यदि सरकार इस मामले की जांच का आदेश देती है, तो वे जांचकर्ताओं के सामने सभी आवश्यक सबूत पेश करने के लिए तैयार हैं।
पिछली जांच की स्थिति
गृह मंत्री चेन्निथला ने विधानसभा में बताया था कि 2006 के सड़क प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों की वीएसीबी ने जो जांच शुरू की थी, उसे बाद में बंद कर दिया गया था। हालांकि, इस निर्णय पर सवाल उठाए गए थे, क्योंकि आरोप था कि किसी भारी दबाव के चलते जांच को रोका गया। चेन्निथला ने कहा कि आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई थी, इसलिए वीएसीबी ने आगे की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं समझी।
अन्य आरोप
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि 2003 से 2006 के बीच बिना किसी तय टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बांटे गए 76 निर्माण कार्यों से जुड़ी सतर्कता जांच में भी ज्ञानेश कुमार का नाम सामने आया था। हालांकि, अनियमितताओं को साबित नहीं किया जा सका, इसलिए सतर्कता विभाग ने सभी कानूनी कार्यवाही रोक दी।
