केरल में मानसून की दस्तक, देशभर में बारिश की संभावना
मानसून की शुरुआत
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 2 से 3 दिनों में केरल में प्रवेश कर सकता है। आमतौर पर यह मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, लेकिन इस वर्ष इसमें कुछ देरी हो रही है।
मौसम की स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल मौसम है। बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में भी मानसून की गतिविधियाँ बढ़ सकती हैं।
पहले के अनुमान
पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि मानसून 26 मई को केरल पहुंचेगा, लेकिन इसकी गति धीमी हो गई। अब यह संभावना जताई जा रही है कि यह जून के पहले सप्ताह में पहुंचेगा।
बारिश की स्थिति
देशभर में हीटवेव का प्रभाव समाप्त हो चुका है। राजस्थान के अजमेर, नागौर और चित्तौड़गढ़ में सोमवार को ओलावृष्टि हुई। मध्य प्रदेश के चार जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी है।
उत्तर प्रदेश के झांसी और ललितपुर में तेज बारिश हुई, जबकि 63 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के सासाराम में भी दोपहर बाद बारिश हुई। झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पंजाब सहित 27 राज्यों में हल्की से भारी बारिश की संभावना है।
कम बारिश की संभावना
मौसम विभाग ने बताया कि इस वर्ष देश में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। पूरे सीजन में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 90% रहने का अनुमान है।
LPA का अर्थ है किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों के दौरान हुई औसत बारिश। भारत में 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार, मानसून की औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। यदि किसी वर्ष बारिश LPA के 90% से कम होती है, तो इसे सामान्य से कम बारिश माना जाता है।
अल नीनो का प्रभाव
IMD का कहना है कि इस वर्ष कम बारिश का एक प्रमुख कारण अल नीनो हो सकता है। अल नीनो एक मौसमीय स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिसका प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ता है और अक्सर बारिश कम होती है।
फिलहाल प्रशांत महासागर में स्थिति धीरे-धीरे अल नीनो की ओर बढ़ रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जून में एल नीनो कमजोर रह सकता है, लेकिन सितंबर तक यह मध्यम या मजबूत रूप ले सकता है।
