केरल में कांग्रेस का वाम मोर्चे पर हमला, चुनावों में जीत का विश्वास

कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता पिनारायी विजयन के नेतृत्व वाली सरकार से तंग आ चुकी है और आगामी विधानसभा चुनावों में इसे सत्ता से बेदखल करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। वेणुगोपाल ने पार्टी की एकजुटता और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा की, साथ ही विपक्ष के नेता वीडी सतीशान के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश को राजनीतिक हथकंडा बताया।
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केरल में कांग्रेस का वाम मोर्चे पर हमला, चुनावों में जीत का विश्वास

कांग्रेस सांसद का वाम सरकार पर हमला

कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य की जनता पिनारायी विजयन के नेतृत्व वाली सरकार से ऊब चुकी है और आगामी विधानसभा चुनावों में इसे सत्ता से बाहर करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। वायनाड में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ हुई बैठकों के बाद उन्होंने यह बात कही। वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी ने पिछले दो दिनों में गहन विचार-विमर्श किया है और अब एकजुट होकर नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।


 


उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक ओर सीपीएम सरकार को फिर से सत्ता में लाने की बात कर रही है, लेकिन जनता का मन स्पष्ट है कि वे इस सरकार को हटाना चाहती हैं। सभी लोग उत्साह और दूरदृष्टि के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। हम केरल में जीत हासिल करेंगे। विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच वेणुगोपाल की ये टिप्पणियां आई हैं। इससे पहले, कांग्रेस नेता ने विपक्ष के नेता वीडी सतीशान के खिलाफ सीबीआई जांच की केरल सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (VACB) की सिफारिश को चुनावों से पहले CPI(M) का राजनीतिक हथकंडा बताया था।


 


वेणुगोपाल ने पत्रकारों से कहा कि यह स्पष्ट रूप से चुनाव के समय की चाल है। आगामी चुनावों में कोई भी CPM सरकार को नहीं बचा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। VACB ने उन आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की सिफारिश की है कि सतीशान ने पुनर्जनी आवास परियोजना के लिए अवैध विदेशी धन प्राप्त किया था। यह परियोजना 2018 में केरल में आई विनाशकारी बाढ़ में बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए शुरू की गई थी। इस सिफारिश में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघनों का हवाला दिया गया है और साथ ही सतीशान की विदेश यात्रा पर भी सवाल उठाए गए हैं, जो कथित तौर पर विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति के बिना की गई थी।