केजरीवाल ने 'फांसी घर' मामले में विधानसभा समिति के समक्ष पेश होकर स्पष्टीकरण दिया
दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल का स्पष्टीकरण
पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को 'फांसी घर' मामले के संदर्भ में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष अपनी बात रखी। समिति की अध्यक्षता प्रद्युमन सिंह राजपूत कर रहे थे, जहां केजरीवाल ने विधानसभा परिसर में स्थित एक शाफ्ट को 'फांसी घर' के रूप में मान्यता देने और इसे आम जनता के लिए खोलने के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए। इस विशेषाधिकार समिति में विधायक सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, सतीश उपाध्याय, नीरज बसोया, रवि कांत, राम सिंह नेताजी और सुरेंद्र कुमार भी शामिल थे।
फांसी घर का मामला और केजरीवाल का बयान
यह मामला दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता द्वारा उठाया गया था, जिसमें 9 अगस्त, 2022 को उद्घाटन किए गए 'फांसी घर' की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा परिसर एक ऐतिहासिक इमारत है, जो 1912 में ब्रिटिश शासन के दौरान बनी थी, जब राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। उन्होंने बताया कि 2022 में तत्कालीन अध्यक्ष राम निवास गोयल के प्रयासों से पता चला कि इस इमारत के एक कोने में फांसी का तख्ता था, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी।
केजरीवाल का आरोप और दिल्ली की स्थिति
केजरीवाल ने आगे कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष ने उन्हें बुलाकर कहा था कि इसे पर्यटकों के लिए खोल देना चाहिए ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने इसे खोला और उद्घाटन किया। अब, जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, वे इसे एक टिफिन रूम साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि यह स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। उन्होंने विधानसभा में उपस्थित लोगों से पूछा कि उनके पास इस बात का क्या सबूत है कि यह एक टिफिन रूम था, और कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है।
दिल्ली की समस्याएं और केजरीवाल की चिंताएं
केजरीवाल ने यह भी कहा कि दिल्ली के लोग परेशान हैं और उन्हें आम आदमी पार्टी की सरकार की याद आ रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हर जगह कूड़ा फैला है, प्रदूषण बढ़ रहा है, सड़कें खराब हैं, मोहल्ले के क्लीनिक बंद हो रहे हैं, और अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी कमेटी ने उनसे पूछा होता कि सीवर और सड़कें कैसे ठीक करें, तो वह खुशी से अपना अनुभव साझा करते। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिल्ली को ठीक से चलाना नहीं चाहती।
