केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर का 71वां जन्मदिन: जीवन की रोचक बातें

केंद्रीय मंत्री डॉ. एस जयशंकर आज अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके जीवन में कई रोचक पहलू हैं, जैसे कि उनका जन्म, शिक्षा, और विदेश सेवा में करियर। उन्होंने चीन और अमेरिका जैसे देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 2019 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। उनके स्पष्ट और तथ्यात्मक दृष्टिकोण ने उन्हें एक प्रभावशाली कूटनीतिज्ञ बना दिया है। जानें उनके जीवन की और भी दिलचस्प बातें।
 | 
केंद्रीय मंत्री एस जयशंकर का 71वां जन्मदिन: जीवन की रोचक बातें

एस जयशंकर का जन्मदिन

आज, 09 जनवरी को, केंद्रीय मंत्री डॉ. एस जयशंकर अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। विदेश मंत्री के रूप में, उन्होंने अपने बयानों से हमेशा विरोधियों को प्रभावी जवाब दिया है। चाहे वह चीन के साथ एलओसी पर स्थिति हो या आतंकवाद, एस जयशंकर ने अपने तर्कों से हमेशा विरोधियों को मात दी है। वह प्रधानमंत्री मोदी के पसंदीदा कूटनीतिज्ञों में से एक रहे हैं। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

एस जयशंकर का जन्म 09 जनवरी 1955 को नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता, के सुब्रमण्यम, एक प्रसिद्ध राजनीतिक विशेषज्ञ और सिविल सेवक थे। एस जयशंकर ने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उन्हें कूटनीति और राजनीति की गहरी समझ प्रदान की।


विदेश सेवा में करियर

1977 में, एस जयशंकर ने भारतीय विदेश सेवा में कदम रखा और उनका राजनयिक करियर लगभग चार दशकों तक फैला रहा। उन्होंने चीन, अमेरिका, सिंगापुर और चेक गणराज्य जैसे महत्वपूर्ण देशों में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया। विशेष रूप से, उनकी तैनाती चीन और अमेरिका जैसे संवेदनशील देशों में हुई, जो भारत की विदेश नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 2015 में, वह भारत के विदेश सचिव बने और 2018 तक इस पद पर रहे। इस दौरान, उन्होंने चीन नीति, भारत-अमेरिका संबंधों और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को नई दिशा दी।


राजनीतिक करियर और विदेश मंत्री का पद

2019 में, एस जयशंकर ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और मोदी सरकार में विदेश मंत्री बने। राज्यसभा सांसद के रूप में, उन्होंने संसद और वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उनकी पहचान एक स्पष्ट, सीधे और तथ्यों पर आधारित कूटनीतिज्ञ के रूप में बनी है। चाहे वह यूक्रेन संकट हो, पश्चिमी देशों के साथ संबंध या चीन के साथ सीमा विवाद, हर मामले में उन्होंने भारत के राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी।


वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व

एस जयशंकर को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो बिना किसी हिचकिचाहट के भारत का पक्ष रखते हैं। उनके बयानों में आत्मविश्वास और रणनीतिक संतुलन दोनों ही दिखाई देते हैं। एक डिप्लोमेट से नेता बनने का उनका सफर यह दर्शाता है कि शिक्षा, अनुभव और स्पष्ट सोच कैसे किसी देश की विदेश नीति को दिशा दे सकती है।