केंद्र सरकार ने डिजिटल फॉरेंसिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य परीक्षक नियुक्त किए
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य परीक्षकों की नियुक्ति
केंद्र सरकार ने डिजिटल फॉरेंसिक ढांचे को सुदृढ़ करते हुए पांच नए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य परीक्षकों की घोषणा की है, जिसमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की विशेष इकाई 'स्पेशल इंस्ट्रूमेंट्स विंग' (एसआईडब्ल्यू) भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम डिजिटल अपराधों से संबंधित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की क्षमता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
ड्रोन फॉरेंसिक की जिम्मेदारी
सूत्रों ने बताया कि एसआईडब्ल्यू को ड्रोन फॉरेंसिक के विशेष क्षेत्र की जांच का कार्य सौंपा गया है, जो इस बात का संकेत है कि ड्रोन से जुड़े साक्ष्यों का महत्व बढ़ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की भूमिका
कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइस फॉरेंसिक्स से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच मुंबई के न्याय सहायक प्रयोगशाला संचालनालय (डीएफएसएल), गोवा के राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) और कोलकाता के केंद्रीय अपराध विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) द्वारा की जाएगी। जयपुर में राज्य अपराध विज्ञान प्रयोगशाला का 'साइबर फॉरेंसिक डिवीजन' भी इस कार्य में शामिल होगा।
नए आपराधिक कानूनों का प्रभाव
गृह मंत्रालय नए आपराधिक कानूनों के तहत फॉरेंसिक बुनियादी ढांचे के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसका उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना है। गृह मंत्री अमित शाह ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व पर जोर दिया है। राष्ट्रीय अपराध विज्ञान अवसंरचना विस्तार योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है, जिसके तहत 2024-25 से 2028-29 तक 2,254.43 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
