केंद्र सरकार का नया नियम: निजी वाहनों के लिए अनिवार्य फिटनेस टेस्ट

केंद्र सरकार ने निजी वाहनों के लिए फिटनेस और प्रदूषण जांच में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के अनुसार, अब कारों और बाइक्स को भी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर फिटनेस टेस्ट कराना होगा। यह कदम बढ़ते वायु प्रदूषण और वाहनों की फिटनेस को लेकर चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया है। जानें इस नए नियम के तहत क्या-क्या बदलाव होंगे और कैसे यह प्रक्रिया लागू की जाएगी।
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केंद्र सरकार का नया नियम: निजी वाहनों के लिए अनिवार्य फिटनेस टेस्ट

नई परिवहन नीति का प्रस्ताव

केंद्र सरकार का नया नियम: निजी वाहनों के लिए अनिवार्य फिटनेस टेस्ट


नई दिल्ली: केंद्र सरकार निजी वाहनों के लिए फिटनेस और प्रदूषण जांच में महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन का एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, अब कारों और बाइक्स जैसे निजी वाहनों को भी पंजीकरण नवीनीकरण के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) पर फिटनेस टेस्ट कराना अनिवार्य होगा, जैसे कि यह पहले से ही वाणिज्यिक वाहनों के लिए लागू है।


फिटनेस सर्टिफिकेट की नई प्रक्रिया

इस ड्राफ्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग बिना टेस्ट के फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त न कर सकें। यह कदम बढ़ते वायु प्रदूषण और वाहनों की फिटनेस को लेकर बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया है।


अभी तक, निजी वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट 15 साल बाद नवीनीकरण के लिए आवश्यक होता है, और उसके बाद हर पांच साल में टेस्ट कराना अनिवार्य है। नए नियमों के तहत, निजी वाहनों को भी वाणिज्यिक वाहनों की तरह ATS पर जाना होगा, जहां देश में वर्तमान में 160 से अधिक ATS कार्यरत हैं।


फिटनेस टेस्ट की नई शर्तें

मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार, फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने से पहले ATS या निरीक्षण अधिकारी को वाहन का कम से कम 10 सेकंड का जियोटैग्ड वीडियो अपलोड करना होगा। इस वीडियो में वाहन के चारों ओर का दृश्य, रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट, चेसिस नंबर, इंजन नंबर और वाहन की मुख्य विशेषताएं स्पष्ट रूप से दिखनी चाहिए।


गाड़ियों की कबाड़ घोषित करने की प्रक्रिया

यदि कोई वाहन फिटनेस टेस्ट में असफल होता है और 180 दिनों के भीतर 'फिट' घोषित नहीं होता, तो उसे 'एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ELV)' यानी कबाड़ के रूप में मान्यता दी जाएगी। यह जानकारी वाहन डेटाबेस में 'ELV' के रूप में दर्ज की जाएगी।


अधिकारियों का कहना है कि पहले लोग 180 दिनों की समय सीमा समाप्त होने से पहले फीस जमा करके इसे बढ़ा लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। गाड़ी को पहली बार 'अनफिट' घोषित होने के 180 दिनों के भीतर 'फिट' होना होगा। यह सुनिश्चित करने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं कि कोई भी ATS गलत टेस्ट परिणाम न दे।